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Saturday, February 9, 2013

भावी प्रबल

"सुनहु भरत भावी प्रबल बिलखि कहेउ मुनिनाथ।
हानि लाभु जीवनु मरनु जसु अपजसु बिधि हाथ।।'
 - [श्रीरामचरितमानस/अयोध्याकांड।।/दोहा-171।।]

 मुनिनाथ ने बिलखकर (दुखी होकर) कहा - हे भरत! सुनो, भावी (होनहार) बड़ी बलवान है। हानि-लाभ, जीवन-मरण और यश-अपयश, ये सब विधाताके हाथ हैं।।171।।

*************** 
~ सुन्दरकाण्ड ~
 जिमि अमोघ रघुबर कर बाना। एही भाँति चलेउ हनुमाना।।1/4।।

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखी कोसलपुर राजा।।4/1।।

सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान।
सादर सुनहिं ते तरहिं भव सिंधु बिना जलजान।।60।।
*************
सियावर रामचंद्र जी की जय!
पवनसुत हनुमान जी की जय!
उमापति महादेव जी की जय!
_ श्री .

Friday, February 8, 2013

गाड़ी बुला रही है ..ओह! बचपन!!

गाड़ी बुला रही है - Gaadi Bula Rahi Hai (DOST -1974)

 

(Kishore Kumar)

Movie/Album : दोस्त (1974)
Music By : लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
Lyrics By : आनंद बक्षी
Performed By : किशोर कुमार
On Screen : धर्मेन्द्र    
                                                ...ओह! बचपन!!
                                                           धरम-पा जी

गाड़ी बुला रही है,
सीटी बजा रही है......
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है......
चलना ही ज़िंदगी ..ई है
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है ....
सीटी बजा रही है...

देखो वो रेल ...
बच्चों का खेल ...
सीखो सबक जवानों......ओ ..ओ ..ओ
देखो वो रेल ...
बच्चों का खेल ... 
सीखो सबक जवा-आ-आ-नों ...
सर पे है बोझ ...
सीने में आग ...
लब पे धुंआ है जानो ...
फिर भी ये गा रही है ...
नगमें सुना रही है ...
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...

आगे तूफ़ान ...
पीछे बरसात ... 
ऊपर गगन पे बिजली ...ई ई ...
आगे तूफ़ान ...
पीछे बरसात ...
ऊपर गगन पे बिजली ई ...
सोचे न बात ... 
दिन हो के रात ...
सिगनल हुआ के निकली --<<<इस लाइन को मैं और शशि(My Brother) मिलकर गाते थे _ "सेग्नल होंके के नेक्ली ..इई ..." >>> --उस वक़्त ट्रेन की ज़र्नी हमारे लिए सुहाने सपने हुआ करती थी। फिल्म में इस लाइन के विजुवल में ट्रेन को गुजरने की इजाज़त देती "सिगनल" जब अपनी "बाँह" गिराती थी तो हमें रोमांच हो आता था। बाबूजी के साथ ट्रेवल करते समय सड़क पर कोई रेलवे का बंद फाटक मिलता था तो बाबूजी देर होने से जहां खीजते थे, हम दोनों भाई ट्रेन और सिगनल का 'वो' ही सीन, 'वो' ही तालमेल देखने के लिए प्रत्याशा से, ख़ुशी के मारे खिल उठते थे ..., ट्रेन को आँखों के सामने से '_लाइव_!' "यूँ " गुजरते देख हम सुर में सुर मिलाकर गाने लगते थे ..., --
देखो वो आ रही है ...
देखो वो जा रही है ...
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है ...
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...

आते हैं लोग ...
जाते हैं लोग ...
पानी के जैसे रेले ...
आते हैं लोग ...
जाते हैं लोग ...
पानी के जैसे रेले ...
जाने के बाद ... 
आते हैं याद ...
गुज़रे हुए वो मेले,
यादें मिटा रही हैं ...
यादें बना रही हैं ...
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है ...
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है ..ए ए ...
सीटी बजा रही है...

गाड़ी को देख ...
कैसी है नेक ... 
अच्छा बुरा न देखे ...ए ए ...
गाड़ी को देख ...
कैसी है नेक ... 
अच्छा बुरा न देखे ... 
सब हैं सवार ...
दुश्मन के यार ...
सबको चली ये ले के ...
जीना सिखा रही है ...
मरना सिखा रही है ...
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है ...
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है,
सीटी बजा रही है...

सुन ये पैगाम ...
ये है संग्राम ...
जीवन नहीं है सपना ...
दरिया को फ़ांद ...
पवर्त को चीर ...
रस्ता बना ले अपना ...
नींदें उड़ा रही है ...
जागो जगा रही है ...
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है ...
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है.............

'साहब! इस गीत को गाने के बाद भी क्या आप अपनी हिम्मत भरी जीवन को थकने देंगे ...?'
'बेटा! फिल्म और ज़िन्दगी में शायद यही फर्क है!, पेट भरा हुआ हो न तो ऐसे बोल फूटते ही हैं!' --<<:इस जैसा डायलोग बोलके खुदको निराश मत कीजियेगा।' -गुजारिश है। निवेदन है। प्रार्थना है ...गाइये .....
गाड़ी का नाम ...
ना कर बदनाम ...
पटरी पे रख के सर को ...
हिम्मत न हार ...
कर इंतज़ार ...
आ लौट जाएं घर को ...
ये रात जा रही है ...
वो सुबह आ रही है ..
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है ...
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है,
सीटी बजा रही है...
गाड़ी बुला रही है,
सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है,
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है,
सीटी बजा रही है.............
http://www.youtube.com/watch?v=4A9nWHXXy00
http://www.youtube.com/watch?v=x7eGDwXjUeU
[खेद है यह फिल्म "दोस्त-1974" सिनेमा में तो अब क्या लगेगा, किसी DVD स्टोर में उबलब्ध नहीं ...न online, न किसी लोकल स्टोर में ..]
मोबाइल बज रहा है ...
"हलो!"
"हाँ, पापा?"
"हाँ! बेटा!"
" पापा ..ओ`, पैसा जमा करवा दिए हैं?"
"ठक!ठक!ठक!"
"हाँ! के555?"
"तेवारे जे ...?"
"हाँ?"
"बाबू बोलआ रहे हैं।"
"चलअ, आवइत हियऊ!"
"ए जीइई555!"
"हं...?"
" ई कपड्वा सब घरे हीं धोआयेगा कि धोबी घरे जाएगा? ...बोलते काहे नईं हैं? ...ओहो..ह:, ई त जब देखिये तब्ब कंप्यूटरवे पर बईठ के दिनभर का जानि का कुटत रहते हैं!..."
"ए बबुआ, सिरीकांत?"
"हं, माँ?"
"तनी ई देख त, ई दवइया दिन-भ में एक बे खाए के बा कि दू बे?"
"ए, तेवारी जे?"
"अर्रे हाँ, ईयार चलइत हियऊ!"
"पपा555!"
"देत्तेरत्त!! का है?"
"दो सौ दीजिये।"
"कहे ला?"
"सैम्पल पेपर खरीदना है।"
"तेवारे जे, इ कोई अइले हवआ।"
"के हई? ..हं, का भाई, का बात है?"
"भईया, उसका भाई डेथ कर गया!'
"..........................................."
"..........................................."
"..........................................."

अब गा के दिखाओ..........

जीना सिखा रही है ...
मरना सिखा रही है ...
गाड़ी बुला रही है ...
सीटी बजा रही है...
चलना ही ज़िंदगी है ...
चलती ही जा रही है......
गाड़ी बुला रही है,
सीटी बजा रही है...









_श्री .

Thursday, February 7, 2013

जिम कॉर्बेट की पुस्तक "मेरा हिन्दुस्तान"

कई दिन हुए, मैंने fb पर 'वर्ल्ड ऑफ़ फिक्शन' में जिम कॉर्बेट की पुस्तक "मेरा हिन्दुस्तान" के सन्दर्भ में प्रियवर बंधू हसन ज़हीर साहब का लेख पढ़कर एवं उनके विचार से बहुत प्रभावित हो कर उन्हें मेसेज कर मैंने इस पुस्तक को प्राप्त करने का उपाय पूछा था। उनके बताये अनुसार मैंने इस पुस्तक के लिए तभी बुक अड्डा डॉट कॉम पर 'आर्डर' कर दिया था। अभी-अभी ये पुस्तक मुझे डेलिवर हुई है। मैं अपनी ख़ुशी और हसन ज़हीर भाई जान की कृतज्ञता बयाँ नहीं कर सकता। _फिर भी,... शुक्रिया भाई जान! ... तहे दिल से शुक्रिया।











 _श्री .

Wednesday, February 6, 2013

फिल्म 'हकीकत' का ये गीत

मैं ये सोच कर उसके दर से उठा था कि वो रोक लेगी मना लेगी मुझको ....
(मेरे मित्र, भ्रातृवत डॉक्टर श्री राजेश पराशर जी के सौजन्य से; क्योंकि उन्होंने ही इसकी याद दिलाई तो प्रेरणा आई।)>>
main ye sochkar uske dar se uThaa thaa मैं ये सोचकर उसके दर से उठा था 
ke vo rok legi manaa legi mujhko के वो रोक लेगी मना लेगी मुझको 
havaaon mein lahraataa aataa thaa daaman हवावों में लहराता आता था दामन
ke daaman pakaDkar biThaa legi mujhko के दामन पकड़कर बिठा लेगी मुझको 
kadam aise andaaz se uTh rahe the क़दम ऐसे अंदाज़ से उठ रहे थे 
ke aavaaz dekar bulaa legi mujhko के आवाज़ देकर बुला लेगी मुझको 
magar usne rokaa मगर उसने रोका
na usne manaayaa न उसने मनाया 
na daaman hi pakaDaa न दामन ही पकड़ा 
na mujhko biThaayaa न मुझको बुलाया 
na aavaaz hi dii न आवाज़ ही दी 
na vaapas bulaayaa न वापस बुलाया 
main aahistaa aahistaa baDhtaa hi aayaa मैं आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ता ही आया
yahaaN tak ke us se judaa ho gayaa main -2 यहाँ तक के उससे जुदा हो गया मैं ...
 
यहाँ तक के उससे जुदा हो गया मैं ...
judaa ho gayaa main -4

जुदा हो गया मैं ... 
जुदा हो गया मैं ... 
जुदा हो गया मैं ... 
जुदा हो गया मैं ...
  http://www.youtube.com/watch?v=ALn8z12A0p0
फिल्म 'हकीकत' का ये गीत (हमारे समय के खलनायक) सुधीर पर फिल्माया गया था। उसकी प्रेमिका तत्काल शादी से इसलिए इनकार कर देती है क्योंकि सुधीर को ऑर्डर्स मिल चुके थे। चीन के आक्रामक तेवर की वजह से उसकी छुटीयाँ कैंसिल हो जातीं हैं और उसे उसी समय फ्रंट पर जाने का हुक्म हो चुका होता है। इनकार करती मंगेतर उससे रूखेपन से पेश आती है। सुधीर तल्ख़ वातावरण में ही उससे विदाई लेता है। जाते-जाते वो अपनी मंगेतर से पूछता है -'मुझे खत लिखोगी?" तो वो मना कर देती है। टूटे ह्रदय से फौजी, सुधीर चला जाता है, लेकिन फ्रंट पर उसे कोई ख़त नहीं मिलता। उसका एक साथी ख़त न मिलने पर उसकी खिल्ली उड़ाता है। मायूस सुधीर ख़त के इंतज़ार में बैठा है कि बैकग्राउंड से ये गीत रफ़ी साब की भीनी आवाज़ में सभी टूटे दिलों को आवाज़ देती है। ...आखिरकार जंग छिड़ जाती है। सुधीर को गोली लग जाती है, उसका एक साथी (ह्रितिक रौशन के ससुर संजय खान साहब) उसे बचाने के लिए उसके घायल जिस्म को काफी दूर तक ले जाता है, पर प्यास और थकान उसे तोड़ देती है, सुधीर उससे इल्तजा करता है कि वो उसे छोड़कर चला जाय। संजय चला जाता है। और एक चट्टान की ओट में अपनी बेबसी पर फुट-फूटकर रो पड़ता है। इधर सुधीर अपने ज़ख़्मी, गोली खाई शरीर को कुछ दूर घसीटता है पर उसका बल चुक जाता है और वो शिथिल पड जाता है। तभी बैकग्राउंड से यही गीत इस बार दर्द और बेबसी में डूबे स्वर में गूंजती है ...सुधीर के प्राण निकल जाते हैं, और इसबार 'हमारी' आँखों से दर्द औए बेबसी के अविरल आँसू बहने लगते हैं.....

_श्री .