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Friday, February 15, 2013

Oh Goddess Sarasvathi,

15, फ़रवरी`2013
बोकारो---------रांची--------लोहरदगा
सरस्वती वन्दना  
Hindu Goddess Saraswati Image 
Saraswati Vandana Lyrics 
 Devotional Prayer to Goddess Saraswati
"या कुन्देन्दु तुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणा वरदण्डमंडितकरा या श्वेतपद्मासना।।
या ब्रम्हाच्युतशंकर प्रभितिर्भिःदैवै सदावन्दिता 
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाडयापहा।।"
अर्थात
 जिनका वर्ण कुंद-इंदु (बेला/चमेली के पुष्प),चन्द्रमा अथवा बर्फ के परत की तरह शुभ्र (श्वेत) है,
जिनके वस्त्र श्वेत हैं (जिन्होनें शुभ्र-श्वेत वस्त्र धारण किया हुआ है),
जिनके हाथ वीणा से सुशोभित हैं,
जो श्वेत-कमल के पुष्प पर आसीन हैं,
ब्रम्हा, विष्णु और महेश जिनकी सदा वन्दना करते हैं,
वे (वह) भगवती, माता सरस्वती सदा मेरी (हमारी) रक्षा करें।

**********
Ya Kundendu Tushaara Haara Dhavalaa
Ya Shubhra Vastraavrita
Ya Veena Vara Danda Manditakara
Ya Shveta Padmaasana

Ya Brahma Achyutaha Shankara Prabrithibhih
Devai SadaaVanditaa
Saa Maam Paatu Saraswathi Bhagavati
Nishyesha Jyaadyaapaha

Saraswati Vandana Meaning

Oh Goddess Sarasvathi,
who is fair as a jasmine flower,
the moon or a snow flake,
who is dressed in white
and whose hands are adorned by veena,
who is seated in a white lotus,
to whom Brahma, Vishnu and Maheshwara pray,
please protect us.
 निवेदक :
विनीत,
_श्रीकान्त तिवारी .

Sunday, February 10, 2013

दिल करता, ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता

 राँची हाल्ट !

'आदमी और इंसान' की सदाबहार, लोमहर्षक जोशीला गीत:



दिल करता, ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ऐसा कुछ कर पायें ... ... ...
यादों में बस जायें ...
दिल करता, ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
हो .........................................सदियों जहान में हो
चर्चा ..  हमारा .........
दिल करता, ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता

जलती मशालें लेके मेलिनी को रातों में ...
मेलिनी की रातों में ...
होय! ... होय!
आगे-आगे हम चलें यारों की बारातों में ...
यारों की बारातों मे
होय! ... होय!
हँसे कोई भोली-भाली अपनी भी बातों मे ...
अपनी भी बातों में ...
होय! ... होय!
किसी की कलाई आए अपने भी हाथों में ...
अपने भी हाथों में ...
हो .........................................सदियों जहान में हो
चर्चा ..  हमारा .........
दिल करता, ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ऐसा कुछ कर पायें ... ... ...
यादों में बस जायें ...
दिल करता, ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता

हमसा जियाला कोई मिले न हज़ारों में ...
मिले न हज़ारों में ...
होय! ... होय!
मारें चाहें जीयें रहें अगली कतारों में ...
अगली कतारों में ...
होय! ... होय!
झलके हमारा लहु कल की बहारों में ...
कल की बहारों में ...
होय! ... होय!
आशिकों का तोहफा होके बंट जायें यारों में ...
बंट जायें यारों में ...
होय! ... होय!
हो .........................................सदियों जहान में हो
चर्चा ..  हमारा .........
दिल करता, ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ऐसा कुछ कर पायें ... ... ...
यादों में बस जायें ...
दिल करता, ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता
ओ यारा दिलदारा मेरा दिल करता

इसे जरूर देखिये और गाइये ...
  http://www.youtube.com/watch?v=3adU-Pg7g-o
इसके विडियो के गीत पूरा होने के बाद महेन्द्र कपूर साब, गीतकार साहिर लुधियानवी साब और संगीतकार रवि साब की फोटो फाइल है, गीत के साथ।   

गाने में एयर फ़ोर्स के जवानों के उल्लास और वीरता की शानदार थिरकन देखते बनती है। गीत में जवानो की तरफ से स्वर्गीय रूपेश कुमार का शानदार परफोर्मेंस देखकर रोमाच हो आता है।

_श्री .

Saturday, February 9, 2013

भावी प्रबल

"सुनहु भरत भावी प्रबल बिलखि कहेउ मुनिनाथ।
हानि लाभु जीवनु मरनु जसु अपजसु बिधि हाथ।।'
 - [श्रीरामचरितमानस/अयोध्याकांड।।/दोहा-171।।]

 मुनिनाथ ने बिलखकर (दुखी होकर) कहा - हे भरत! सुनो, भावी (होनहार) बड़ी बलवान है। हानि-लाभ, जीवन-मरण और यश-अपयश, ये सब विधाताके हाथ हैं।।171।।

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~ सुन्दरकाण्ड ~
 जिमि अमोघ रघुबर कर बाना। एही भाँति चलेउ हनुमाना।।1/4।।

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखी कोसलपुर राजा।।4/1।।

सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान।
सादर सुनहिं ते तरहिं भव सिंधु बिना जलजान।।60।।
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सियावर रामचंद्र जी की जय!
पवनसुत हनुमान जी की जय!
उमापति महादेव जी की जय!
_ श्री .