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Tuesday, August 6, 2013

क्या करूँ?

*_मुझे नाचना और गाना नहीं आता। क्या करूँ?
*_कहते हैं 'रेस्ट इन पीस'! सभी "पीस: में ही -रेस्ट- करना चाहते हैं! जबकि भारी कोलाहल है। पीस-पीस कर टुकड़े-टुकड़े होकर भी पीस नहीं। क्या करूँ?
*_आज भी हमारे (राँची) अपार्टमेंट में हमारे पड़ोसी की माताजी का निधन का समाचार मिला! मैंने मेरे छोटे भ्राता कमल को फोन किया कि मुझे पटना की टिकट कटवा दे, तो प्रत्युत्तर में यह सुनने को मिला कि वह भी एक मईयत में व्यस्त है, बाद में बतियायेगा! क्या करूँ?
*_चुप-चाप बैठा था कि फोन आया :"आज बहुरानी" (शिव बाबु के पोते, संजय बाबु के सुपुत्र की वधु) का गृहप्रवेश है! माँ और वीणा के साथ भोजन का निमंत्रण है, और महिलाओं को भोजन के साथ मुँह दिखाई का बुलाहटा है! (वीणा राँची में है) माँ पूछती है मुँह दिखाई में क्या दे? मेरी अक्ल (वीणा) तो रांची में है, हो! क्या करूँ?
*_ये ज़िन्दगी के मेले दुनियाँ में कम न होंगे, अफ़सोस हम न होंगे। क्या करूँ?

Sunday, August 4, 2013

भागवत प्रसाद जी

मौत का तो रोज का मेला है! उसकी रोज होली और दीवाली है! सभी उसके ग्रास हैं! सबकी बारी आनि है! मौत जब आती है तब यह सफाई नहीं देती कि मृतक बेक़सूर था कुसूरवार! मेरे बाबुजी के मित्र, ९४-वर्षीय निःसंतान, भागवत प्रसाद जी कल ११ बजे उसी तरह चाक-चौबंद और स्वस्थ थे! कोई बिमारी नहीं! ना साँस की तकलीफ, ना बीपी, ना शुगर न कोई दवाईयों पर निर्भरता! फिर भी यूँ मारे गए और यूँ उनकी जान निकली जैसे रौशन दीपक अचानक बुझ गया हो! उनकी मारुति वैन ने पलटा खाया और वे हस्पताल पहुँचने से पहले ही संसार को अलविदा कह गए! उनके भांजे की दोनों टांगें टूट गई! और अब उनका परिवार उनकी बाट जोह रहा है! किस उम्मीद में हैं ये लोग ?? एक सप्ताह पहले ही भागवत बाबु मेरे कार्यालय में अपने इसी भांजे के साथ आये थे और मैंने निश्चय किया था कि इनसे जरूर मिल बैठ कर अपने बाबुजी की बातें करूँगा, साथ एक फोटो खिचवाऊँगा  … इनकी नतनी और भांजे की पत्नी को अभी सब्र है और वे इन्तजार में हैं  … लोग पूछ रहे हैं कि भागवत बाबु ने भगवान् का क्या बिगाड़ा था ?? कल की इस दारुण घटना की सूचना लोहरदगा में कल ही आम थी लेकिन उसे मुझ तक पहुँचने में १२ घंटे लग गए जब श्री उदय बाबु ने मुझसे फोनकर पूछा कि :"पता चला तिवारी जी? खुद में ऐसे ही खोये हैं हम! किसी को किसी की कोई सुध-बुध नहीं! बस अपनी आत्म प्रशंसा! और एक दुसरे को नीचा दिखाते घमंड के गाल बजाना! छिः!

Thursday, July 18, 2013

बाबूजी ये आप हैं!

"हज़ारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पर रोती थी,
तब कहीं होता है, चमन में कोई दीदावर पैदा!!"
प्रियवर बाबूजी ये आप हैं!
सादर प्रणाम!
आपका बेटा,
_श्रीकांत .

Sunday, July 14, 2013

देव आनंद ने मुझसे कहा कि कोई कहीं नहीं गया! सब साथ साथ यहीं हैं!

दुर्भिक्ष - भाग-७ ख़त्म होने तक मैं बहुत रो चूका, ...तब आखिर में जब इसके विश्राम तक और आठवें भाग के बीच तक पहुंचा! तब उत्सव मनाने को जी चाहने लगा। हम जैसे लोगों ने जिस जुग में जनम लिया और जिस परिवेष में पले-बढे, उसकी हर सांस में सिर्फ प्यारी-प्यारी फिल्मों और घनिष्ठ मित्र की तरह सभी फिल्म कलाकारों का वास है! उन्हें हम अपना मानते हैं; सगा जानते हैं! इसलिय हम बचपन में जब भी खुशियाँ मनानी होतीं तो उस योजना में फिल्म देखना जरूर शामिल होता था! फिल्म के बगैर कोई सैर कोई पिकनिक पूरी नहीं होती थी! मात्र यही एक साधन था जो हमें सच में ख़ुशी देता था! कोई भी ख़ुशी ..चलो फिल्म देखने! हर बात को हम घुमा फिराकर फिल्मों तक ही ले आने के आदि चुके थे! इन्हीं सभी कलाकारों की फिल्मों देखते हम बड़े हुये!
और आज ...मुझे फ़िल्में देखे लगभग २ महीने से ज्यादा हो चुके हैं! इस बीच और कई नयी पुरानी फ़िल्में जमा हो गयीं! जिन्हें बस खरीद कर रखा ही था कि कई बार घर से बाहर जाना पडा! अब तो काफी दिन हो चुके हैं! देव आनंद से डर लगने लगा था कि उन्हें देखते ही मैं खुद को नहीं संभाल पाऊंगा! राजेश खन्ना की याद आते ही फिल्मों की सोच भी दहलाती थी! कल रात जी कडाकर के मैंने देव आनंद की फिल्म "तीन देवियाँ" निकाली, और उसे चलाया! तब VCD को जिस तरह राइट किया गया है, उसके मुताबिक़ एक बैनर की तरह जब उनकी एक इसी फिल्म की स्टिल फोटो दिखी! फट से डूबते दिल को न जाने कैसे राहत सी मिली! थोड़ी हिम्मत बढी। फिल्म शुरू हुई और अमीन सयानी की आवाज़ सुनते ही जैसे शरीर में फिर से सजीवनी दौड़ पड़ी;  _पात्र परिचय होने लगा तब तीनों देवियों का परिचय कराने बाद उस नौजवान की उपस्थिति हुई; और अमीन सयानी की आवाज़ ने पूछा "..और इन्हें तो आप पहचानते ही होंगे? सिर पर काली टोपी पहने और काले कपडे में वह नौजवान मेरी ओर पलटता है और उनकी मशहूर; ''दंतपंक्तियों से खिली मुस्कान को देखते ही सभी अवसाद दूर हो गया! मन खिला दिल झूमा शरीर स्वस्थ हो गया!
कोताही और कमजोरी मेरी थी! मैंने ही उन्हें भूलने की गुस्ताखी की थी, और नाहक ही निराश और हताश हुआ पडा था!
देव आनंद कहीं नहीं गए! वे हमेशा की तरह 'बिन बदले' मेरे साथ ही मेरे घर में रहते हैं!
इस फिल्म के अंत में मैं बचपन का वही लड़का हूँ, जो फ़िल्में देख ताली और सीटी बजाते हँसता रहता था! (हालांकि मेरी सीटी बढियां नहीं बजती)
और देव आनंद ने मुझसे कहा कि कोई कहीं नहीं गया! सब साथ साथ यहीं हैं!
मेरे पास! सिर हिलाकर मुस्कुराते और हँसते हुये!

Saturday, June 29, 2013

"दुर्भिक्ष!" की भूमिका

          मैं, श्रीकांत तिवारी, अपनी यात्रा वृत्तांत लिख रहा हूँ! यह एक बड़ा प्रोजेक्ट है! और मैं इसे पूरी तवज्जो दे रहा हूँ! कलम से ड्राफ्ट लिखकर 15/06/13 से ही अब तक ढेर लिख चूका हूँ! इसमें उत्तराखंड की त्रासदी की कोई भी नाजायज एडवांटेज लिए बगैर मैं एक "राम कथा" लिखने जा रहा हूँ, जो मर्यादापुरुषोत्तम भगवान् श्रीराम की कथा नहीं मेरे अपने राम an another super human being!! की कहानी कहने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे पढने के लिए कोई बाध्य नहीं! facebook कोई मैच का मैदान या परीक्षा कक्ष नहीं है और ना ही मैंने कोई इम्तिहान पास करने के लिए या तारीफें और अनावश्यक आकर्षण बटोरने के लिए ज्वाइन किया है! मेरी पोस्ट्स को तो मेरे अपने परिवार वाले कोई तवज्जो नहीं देते ना ही मैंने कभी उन्हें अपने पोस्ट्स पर Like & comments के लिए विवश किया है, ना मैं ऐसे छिछोरेपन पर ध्यान देता हूँ! ना मैं कोई लेखक हूँ ना मैं क्रिटिक्स लिखता हूँ ना किसी विवाद में टांग घुसेड़ता हूँ! मेरा सीधा प्रयास सिर्फ मैत्री है; जिसके लिए मैं खुद सबके लिए जी-जान से हाज़िर हूँ! मेरी यात्रा-वृत्तांत को लिखने और छपवाने के मेरे अपने साधन बेशुमार हैं! और मेरे बच्चे मेरे लेख और ब्लॉग को एक किताब के रूप में ढालने के लिए प्रतिबद्ध हैं! जिसका कोई प्रचार-प्रसार-वितरण और विक्रय का उद्देश्य कतई नहीं होगा! यह एक पारिवारिक रिकोर्ड बुक होगी, जिसमे तमाम FACTS भूतपूर्व - और वर्त्तमान के सन्दर्भ में होंगे! मुझे फिल्म देखने, गाने सुनने, घूमने-फिरने, लिखने-पढने, चित्रकारी, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, कंप्यूटर फोटो एडिटिंग का शौक है , कारोबार नहीं! कौन पढता है, नहीं पढता, पर ध्यान दिए बगैर मैं अपनी धुन में मगन अपनी राह का अकेला ऐसा राही हूँ जिसे कदम उठाते ही स्वतः दिशा-ज्ञान हो जाता है! मेरी मंजिल खुद खुश रहने की है, किसी को दुखी करने की नहीं! पर यदि दुश्मनी भी हो जाय तो मुझे परवाह नहीं! और अपनी ख़ुशी से अपनी मर्जी से अपनी ख़ुशी जिसे तुलसीदास जी ने "स्वान्तःसुखाय" की संज्ञा दी है, ऐन वही मेरा ध्येय है! मेरे "राम" की कहानी, मेरी यात्रा वृत्तांत में भोजन में नमक की तरह घुली होगी! मेरी यात्रा वृत्तांत की कहानी बहु-आयामी होगी और कई तरह के शाब्दिक रंगों में रंगी होगी! किसी को शॉकिंग, तो किसी के लिए सच और सच्चाई पर Embarrassing होगी पर Vulgar कदापि नहीं होगी! मेरी कहानी सवाल उठाएगी, चुनौती देगी और ललकारेगी! और यह एक धारावाहिक की तरह (मुझे अभी नहीं पता) कई भागों में होगी! facebook पर मेरे अपने timeline पर पब्लिश यह कहानी मेरे परिवार सहित मेरे दोस्तों के लिए होगी, fb-friends के लिए होगी ही - पर, फिर कहता हूँ, इसे पढना सबकी अपनी-अपनी मर्ज़ी की बात होगी! जिसके Like(s) & Comments से मेरा कोई लेना-देना नहीं होगा! ना ही मैं किसी प्रश्न का उत्तर दूंगा! कोई फोटो संलग्न नहीं करूँगा! उत्तराखंड-केदारनाथ त्रासदी की चर्चा मैं पूरी निष्पक्षता, बेबाकी और दिलेरी से करूँगा! जलियांवालाबाग के अनुभव, स्वर्ण-मंदिर की सैर, वैष्णव देवी-यात्रा, हरिद्वार, ऋषिकेश की चर्चा में मेरे शब्दों से दृश्य प्रस्तुत करने का प्रयास करूँगा! कोई फोटो यदि मुझे पोस्ट करनी होगी तो वो अलग से पोस्ट की जायेगी, यात्रा-वृत्तांत के साथ नहीं! मेरी कहानी के "राम" की कथा लिखना मुझे मेरे मरने से पहले लिखकर मेरे बच्चों को दे जाना अनिवार्य है वरना ये कई ऐतिहासिक सच्चाइयों से वंचित रह जायेंगे! मेरी यात्रा-वृत्तांत का नाम है - "दुर्भिक्ष!"
कौन है यह 'राम?'
चंद शब्दों में ही स्पष्ट हो जाएगा! कोई सस्पेंस नहीं - बस राम की कहानी! और मेरे सवाल !
तो आईये~
सुस्वागतम 
मैं पहले भाग के साथ, तुरंत 
आता हूँ
_श्री . 

उठिए ...... असंभव के विरुद्ध :

उठिए, सारे संसार को दिखाएं कि हम भारतीय कितने जीवट वाले हैं!
 
'घाटी इतनी गहरी कि कुछ समझ में ना आए, पहाड़ी इतनी सीधी, सपाट और चिकनी कि कुछ टिक ना पाए, सबकुछ इतना संकरा कि सांस लेना दूभर - किन्तु इंसानियत और कर्तव्य की भावना भरे हमारे सैनिक वहाँ उतर ही गए!' _ गौरीकुंड और रामबाड़ा के बीच दुरूह जंगलचेट्टी में फंसे कोई एक हज़ार लोगों को बचाने वाले जवानों पर नाज़ करते हुए - एयर मार्शल एस. बी. देव .
 
वो छोटी सी बच्ची बढती बाढ़ में बहने को थी! किन्तु एक बुज़ुर्ग की कमज़ोर बांहों ने उसे मजबूती से  लिया! कोई रास्ता न था! बस, इंसानियत!
वो दो दिन से भूखा-प्यासा! भारी बारिश में बस जिंदा बचा था! परिवार लापता! इसलिए हिम्मत भी गायब! पानी की बोतल देख लपका! "सौ रुपये!", निर्दयी मांग उठी! अरे, इनसे पैसे, वो भी ऐसी लूट? "मेरा क्या रिश्ता है?" - हैवानियत!!
उत्तराखंड त्रासदी हमारे देश की सर्वाधिक बड़ी, सबसे दर्दनाक और सबको हिलाकर रख देनेवाली प्राकृतिक आपदा है! इसमें सरकारों का भी दोष, गंगा में आये उफान की तरह उभर-उभर सामने आ गया है!
किन्तु एक निर्णय का समय भी आ गया है! या तो हम दोष ढूंढना शुरू करें ..., वो तो हम कर ही रहे हैं! कहने का आशय यह है कि या तो हम बस "यह भूल हुई, उन्होंने ऐसा गलत किया, यह हैवानियत है" जैसी बातों में उलझें रहें, ...बहस करते रहें, ...आक्रमण करते रहें! ...या हम अब सब कुछ ठीक कैसे हो, जिंदगियां कैसे बचें, आगे ऐसा न हो - इनके उपाय करें!
निश्चित ही हम जो यात्री फंसे हैं, उन्हें बचाना चाहेंगे! जो इन चार धामों में और आसपास के गावों में रहते हैं, उनकी सहायता करना चाहेंगे! उन जांबाजों को सलाम करना चाहेंगे, जो जान की बाज़ी लगाकर, जान देकर, हमारे प्रियजनों को बचा रहे है!
हम भारतीय हैं - एकजुट हो जाएं तो विश्व में बेजोड़! हमारी सभ्यता ही इंसानियत का आधार है! और संवेदना हमारी सभ्यता का मूलाधार! हम जीवट के हैं! किन्तु इस समय हम बंट गए हैं! हमारा ध्यान बांटा जा रहा है! कभी हमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की गलतियाँ गिनाई जा रही हैं तो कभी गुजरात के मुख्यमंत्री की! दोनों नेता गलत हैं भी! सभी 'बड़े-बड़े', इस भयानक विपदा पर घृणित राजनीति कर भी रहे हैं! किन्तु हम क्यों उन्हें और सम्बंधित छिड़ी बहस पर ध्यान दें? हम क्यों उन विवादों में उलझें जो -"बुद्धिजीवी"- चला रहे हैं? _ कि चार धाम एक बड़ा भारी सिर्फ पैसे कमाने का कारोबार बन गए हैं, ...कि श्रद्धालु भी विकराल गन्दगी फैलाकर पर्यावरण नष्ट कर रहे हैं, ...कि फेंकी हुई एक-एक बोतल भविष्य के खतरे को तैयार कर रही है, ...कि बच्चों को लेकर क्यूँ जाया जाता है, ...कि केवल गरीब मर रहे हैं, ...कि हम भारतीय तो हैं ही ऐसे, ...! जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है! बहुत आपत्तिजनक है! अनजाने में हम किसी न किसी रूप से इसमें शामिल हो गए हैं!
इनके काट्य तर्क भी ढेरों चल रहे हैं! बोतल फेंकने से कोई बाढ़ नहीं आ सकती! बांधों के हिस्से छह-सात मंजिला जितने विशालकाय हैं! बोतलें तो चुटकियों में कुचल जाती है! बच्चों को क्यों नहीं ले जायेंगे? कहाँ रख जाएँ उन्हें? गलती सरकार की है! और तीन दिनों तक तो वहां के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा मानों सो रहे थे! इन सब पर भी तीखी बहस है - जो सरकार ने खड़ी की है! कि बादल फटने, बाढ़ आने, अति वर्षा होने या भूकंप आने में सरकार की क्या गलती? हर बात में सरकार?
हम भारतीय हैं ही ऐसे - यह डरावना झूंठ फैलाया जा रहा है! फ़ैल रहा है! इसे झुठलाना ही होगा! हम भारतीय कैसे हैं - यह संसार के सामने लाना होगा!
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जांबाज सर्वेश कुमार जैसे हैं हम भारतीय! सात साल पहले दूल्हा बने थे! गौरीकुंड में फंसे यात्रियों की जान बचाने पहुंचे थे! जान दे दी! उस व्यापारी रमेश पुरोहित की भारतीयता देखिये! एक हाथ में बच्ची! दूसरा हाथ गरजती लहरों से मुकाबला करता रहा! बाहर फेंक कर बचा दी जान नन्ही की! अपनी ज़िन्दगी जाने दी! सार्थक कर दिया जीवन!
गुजरात भूकंप के उस मुस्तफा की माँ जैसी है भारतीयता! 2001 की उस दारुण दहला देने वाली आपदा में वह उस बच्चे को खुद मरते-मरते भी, अपने रक्त की बूँद से जिंदा रखने में सफल हुई थी! पता नहीं वह उस बच्चे की माँ थी भी या नहीं!
मोरवी की बाढ़ में भी दिखा था सच्चा भारतीय! कुछ नाम रहा होगा! उसने बताया नहीं! पत्रकार तक पता न लगा सके! बस, न जाने किसके बच्चे को अपने पैरों के बंधन में जकड़े किनारा ढूंढता रहा! बलिदान दे गया! जीवनदान दे गया!
विंग-कमांडर डेरिल केस्टलीनो हैं भारतीय! 7-वर्षीय बेटी एंजेलिना बड़ी होकर गर्व करेगी! गौरव गाथा सुनाएगी कि कैसे उसके पापा रूद्रतांडव के शिकार हुए श्रद्धालुओं को ज़िन्दगी देने गए थे! आंसू होंगे, किन्तु एंजेलिना के पापा की वीरता सार विश्व याद करेगा!
आपदा में भूलों को ठीक करने के लिए उनका - उन भूलों का - पता लगाना भी अनिवार्य है! बहस भी आवश्यक! इतनी तबाही के दोषी नेतृत्व - सरकार, नेता, अफसर, पूंजीपति, भ्रष्ट गंठजोड़ हर तरह के दोषियों को दंड मिलना भी उतना ही अनिवार्य और महत्वपूर्ण! किन्तु अभी समय बचाव का है! इलाज़ का है! बसाने का है! लोगों की जिंदगियों में कुछ करने का है! इसके लिए कुछ कर गुजरना होगा! जिन्हें दंड देना है, उनके लिए बाद में भी समय निकाला जा सकता है! वैसे भी इस समय बहस में उलझने से कौन सी उन्हें कोई सज़ा मिल जायेगी? केन्द्रीय मंत्रीगण, मुख्यमंत्री, नेतागण तो यूँ भी चुनाव में हटाय जा सकते हैं / हटाय जायेंगे! किन्तु दोषी अफसरों का तो हम कुछ भी न कर पायेंगे! बेबसी!
 
आपदाएं बिखेर देती हैं हमें! तोड़ देतीं हैं सबकुछ! ऐसे में कुछ उजला, कुछ सकारात्मक सोचना असंभव है! किन्तु सोचना ही होगा! क्योंकि एक आशा, समूचे संसार को बना सकती है! एक, केवल एक विचार! एक विचार ही तो था जिसने विश्वयुद्ध के बाद जीवन खिलाया! अन्यथा लाखों लोग मारे जा चुके थे! एक विचार ही तो था जिसने चीन का पुनर्निर्माण कर दिया - वरना 1931 की येलो रिवर की बाढ़ कोई 37-लाख लोगों को लील गई थी! हमारा अपना कलकत्ता 1737 में ऐसे चक्रवात में तबाह हो गया था कि त्रासदी पढ़कर कोई भी जड़ हो जाए! 1943 के आकाल से पूरा बंगाल बर्बाद हो गया था! बस, एक विचार ही तो था .... ज़िन्दगी सहेजने का! समेटने का! संवारने का!
 
मौत तो जन्म के साथ ही तय हो गई थी! जीवट तो जीवन में है! यही दिखाना होगा! हमसभी को! मिलजुलकर!
और इस समय भगवान् को भूल जाएँ! सबकुछ इंसान को करना है!
जय हिन्द!
 
साक्षी- श्रीकांत तिवारी ...उत्तराखंड से 
(कल्पेश याग्निक के साथ)

Monday, June 10, 2013

आसनसोल इंजीनियरिंग कॉलेज (AEC _W.B.) से जिम्मी की विदाई और घर वापसी :

"...जिम्मी की B.Tech. की पढ़ाई पूरी हुई!
अब उसे वापस घर लौटना है!
अपने जीवन के बहुमूल्य 4-वर्ष एक स्थान पर, गुजारने के बाद, ...उन सभी को पीछे छोड़कर,  ...जो लगातार इन चार वर्षों में अपने 'अपनों' से कहीं ज्यादा "ख़ास" हो गए हैं, ...और जो जान रहे हैं कि अब के बिछड़े ना जाने फिर कब मिलें, ...मिलेंगे भी या नहीं? कॉलेज में पहले ही इन्होंने, और इन-सब के लिए सभी जूनियर्स ने मिलकर एक फेयरवेल पार्टी कर ली है, जिसमे सभी ने एक उत्सव सा, उल्लास भरा समय बिताया, ...एक-दूजे से गले मिलते और सबको शुभकामनाएं देते, ...हँसते-गाते नाचते-झूमते सभी-ने सभी की बुशर्ट (College Uniform, Shirt) पर संदेशे-बधाईयाँ-शुभकामना सहित अपने-अपने हस्ताक्षर, नाम-पते और कांटेक्ट नम्बर्स कई रंग-बिरंगी स्याहियों वाली कलमों से लिख डालीं! ...अब यह शर्ट कभी नहीं धुलेगी! बल्कि एक यादगार बनकर सदैव इनके पास रहेगी! इस फेयरवेल पार्टी की हंसी थमने में थोडा वक़्त लगा, ...फिर हंसी थमी, और ठिठककर एक उदास-सी खामोशी में सूखते पसीने की ठण्ड में बर्फ की तरह जम कर सबके हलक में अटक-सी गई; ...फिर जब ये बर्फ पिघली तो आँखों से अश्रुधारा बनकर फुट पड़ी, जिसका आवेग सबके अपने-अपने मनःस्थिति के मुताबिक था; ...पर था। निर्मल और निश्छल, पवित्र और पावन! ..... एकदूसरे को अपने अंक में भरते ये नौजवान,.... जो देशहित के हेतु नवनिर्माण में अपना-अपना योगदान देने के लिए, अब बिछड़ रहे हैं, कई कई यादों की झोलियों को अपने ह्रदय में लिए एक-दूजे को चूमते और नए वादे के साथ अपने इस घर और परिवार से विदा लेते हैं.....

०९/जून/२०१३ को जिम्मी को घर लिवाने के लिए, हम ८-तारीख की शाम को आसनसोल पहुँच गए! हमें पता चला कि अधिकांश लड़के चले गए हैं केवल जिम्मी ही अब तक रुक हुआ है, चूंकि प्रोग्राम पहले से ही तय था अतः हम तो सही समय पर पहुंचे, लेकिन जिम्मी को उसकी उम्मीद से काफी पहले ही पूरी _छुट्टी/फुर्सत_ मिल गई थी! ५-दिन उसने एक तरह से बोरियत में गुजारे! हमारे पहुँचने पर हमने पाया कि कमरे के बाहर, असलियत में एक फ्लैट; जिम्मी और उसके बाकी छह मित्रों ने मिलकर, जिसे किराए पर लिया हुआ था, के बाहर कार्डबोर्ड के कार्टंस में और यूँ ही खुले पड़े -A HUGE-, भारी कूड़े, और सामानों का अम्बार पड़ा हुआ है! फ्लैट के अन्दर हॉल में भी उसी तरह का एक सामानों का अन्य पहाड़ दिखा! जिम्मी और कुणाल(जिम्मी का मित्र) बस ये २-जने ही थे! बाकी अन्य छ: लड़के; पता चला; जूनियर्स थे! इन्होने हमारी आवभगत की! ठहराया और कोल्ड-ड्रिंक्स वगैरह से हमारी थकान और प्यास को राहत दी! उन सामानों के बारे में पूछने पर इन्होने बतलाया कि बाहर वाला रियल कूड़ा है, जो जिम्मी-&-ग्रुप्स की चार-वर्षीय बचत-खुचत का खफत था! ...और भीतर हॉल वाला नए आगंतुकों (छात्रों) का सामान था! जिसे वे फ्लैट 'पूरा खाली होने', पर अपने-अपने ढंग से अपने-अपने कमरों में रखेंगे! कॉलेज होस्टल की कहानी वही बासी स्टोरी है; कि "कुछ" कारणों और अपने हित में उसे त्यागकर कॉलेज के सामने एक बिल्डिंग के इन्होने एक फ्लैट किराए पर ले लिया था, और सभी कामों के लिए ऐसे इलाकों में उपलब्ध 'चाचियों' में से एक चाची इनके लिए खाना बनाना, कपडे धोना, झाड़ू-बुहारू, बर्तन वगैरह के लिए अवेलेबल थी! इन्होने फ्लैट मालिक द्वारा (किराए में शामिल) उपलब्ध कराये चार फोल्डिंग कोर्ट्स को जोड़कर बिछावन लगा दिया था! और खुशकिस्मती से हमारे लिए एक दुर्लभ चीज़ की बढियां मौजूदगी से हमारी थकान तुरंत मुस्कान में बदल गई, वो थी :"बिजली, और चलता हुआ पंखा!" जो थाना टोली, थाना रोड, लोहरदगा, झारखण्ड में कदापि नहीं पाया जाता! छोडिये इसकी कथा! बहुत थके हैं थोड़ा आराम कर लें, क्योंकि शाम में महिलाओं को 'घुमाना-फिराना' भी है, वस्तुतः जिसके लिए वो आईं हैं!

कोल्ड-ड्रिंक्स पीते और लड़कों से बातों के दरम्यान जूनियर्स [B.Tech. 2ndYr-3rdYr_ fifth semester to seventh semester के] बच्चों से बातचीत हुई! और उनके ही द्वारा जिम्मी के विषय में काफी Overwhelming अनसुनी-अनजानी और ह्रदय को शान्ति, संतुष्टि, प्रसन्नता, गर्व, जोश, हिम्मत और राहत देने वाली जानकारियों को सुनकर हमें हैरानी हुई और आंखें नम! जिम्मी इन सभी बच्चों का अध्यापक है! बड़ा भाई है! "...प्रितीश भैया के होते क्या डर!" "....मुझे तो ये समझ में नहीं आ रहा कि अब मेरा क्या होगा? कौन मुझे Guideline देगा?" "...जानते हैं अंकल प्रितीश भैया ने एक बार.........!" इन बातों में खुलकर मुस्कुराते जिम्मी की धवल दंतपंक्ति को मैं नज़रें चुराकर देखता! हरेक बच्चा _*प्रितीश भैया*_ के विछोह की वेदना में कई किस्से बयान करते गये, और रो पड़े!

मकान मालिक ने सुना कि प्रितीश के माता-पिता, दादी, अंकल, और छोटा भाई 'लड्डू', आये हैं तो ह्रदय-रोग की बाइपास सर्ज़री करा चुके और मधुमेह के रोगी वह कृशकाय वृद्ध जबरन हमें इस फ्लैट के ऊपर निर्मित अपने घर लिवा ले गये और हमारी मेहमाननवाज़ी कर हमें सम्मान दिया! उनकी पत्नी और बहु ने भी हमें जिम्मी कि कई गुणकारी व्यक्तित्वों की हमें जानकारी दी और TCS (http://en.wikipedia.org/wiki/Tata_Consultancy_Services"टाटा कंसल्टेंसीज सर्विसेज़ / Tata Consultancy Services" में जिम्मी की प्लेसमेंट हो जाने पर हमें बधाईयाँ दी! उनसे प्राप्त सम्मान से अभिभूत और कृतज्ञ होकर उनके इसरार पर उनके यहाँ से नाश्ता-चाय के बाद हम सभी और प्रितिश के -सभी दोस्तों- को भी साथ लेकर हमने एक साथ शाम गुजारी, आसनसोल के मशहूर GALAXY MALL में घूमें, फिर एक रेस्टुरेंट में डिनर!

०९/जून/२०१३ की सुबह प्रस्थान से पहले मेरे सुझाव पर बच्चे हमें [माँ, वीणा, धीरू(मेरा मौसेरा भाई) और लड्डू] को कॉलेज घुमाने ले गये! कॉलेज, इतवार होने की वजह से सूना था! सिक्यूरिटी क्लेअरेंस मिलने के बाद हम कॉलेज परिसर के अन्दर गए! और भारी उमस भारी गर्मी और तर-तर पसीने के बावजूद भी सबने खूब एन्जॉय किया! मेरी अनुभूति और रोमांच को सिर्फ मैं ही फील कर रहा था! मेरे मन में एक साथ अनेकानेक विचारों का सत्संग चल रहा था! कॉलेज परिसर में कई जगहों पर हमने फोटो खिचवाये! सभी बच्चों ने महिलाओं को कॉलेज के हरेक हिस्से को दिखलाया! चूंकि इतने व्यापक भू-भाग का भमण काफी समय ले लेता अतः उन्होंने दूरे से ही कई इमारतों को अपनी जोशीली कमेन्ट्री के साथ दिखलाया! फिर बाहर!

बाहर आये तो हमारी गाड़ी के पास और अन्य कई लोग इकट्ठे थे! जिम्मी ने मुझे उनसे मिलवाना चाहा, तो मैंने घडी को ऊँगली से ठकठका कर शीघ्रता करने को कहा और बगल के "जुबली पेट्रोल पंप" पर गाड़ी में तेल भरवाने चला गया! लौटने पर देखा २/३ लोग और आ गए हैं! जिमी ने मुझे उन सभी से मिलवाया! '...ये वो दुकानदार 'भैया' हैं, जिनसे सभी खाद्य-पदार्थ अब तक खरीदते थे'; '...ये ज़ेरॉक्स वाले 'भैया' हैं', '...ये किताब दूकान वाले 'भैया' हैं', 'ये नाश्ते-चाय वाले भैया हैं', ........ ........ ........ मकान मालिक भी हैं! ...सभी दोस्त (जूनियर्स) है! और जिम्मी सबके लिए अनमोल है, जो आज जा रहा है, अपने घर .....
 ...गाडी में जिम्मी   का सारा सामान लादा जा चूका है! ...बारिश के लक्षण हैं, ... पर यहाँ आँखें बरस रही हैं! सभी जिम्मी को अपने अंक में भर कर रो रहें है, (हे, भगवान्!) ...जैसे बेटी की बिदाई हो रही हो, कोई मेरे चरण छूना चाहता है तो उसे बाहों से बीच में ही थामकर, उनसे गले मिल उनके सभी सहयोग के लिए प्रणाम कह रहा हूँ, मैंने मकान मालिक 'सिंह साहब' (बक्सर/ बिहार के मूल निवासी) से विदा ली! सारे बच्चे जिम्मी को गोल घेरे में लेकर इसे चुमते हुए आंसू बहा रहे हैं! महिलाए भी सब्र न कर सकीं! इन्होने सभी का शुक्रिया कहा! और सभी बच्चों को आपना आशीष दिया!  सब रो रहे थे, पर जिम्मी नहीं; उसकी खिली मुस्कान और धवल दंतपंक्ति सबको आश्वासन दे रही कि वो ''तन, मन, धन'', ''मन, वचन, और कर्म'' से सदैव उनसे सम्बंधित रहेगा........!"

हम AEC से निकल पड़े; ......अ ...ल ... वि ...दा ...!
G.T. Road पर सनसनाते_ घर, रांची के लिए!
आसमान कहीं आग बरसा रहा है, तो बादलों की बगावत से उमस और चिपचिपी पसीने वाली गर्मी का भारी हमला है! धनबाद में हमने नाश्ता किया! इसी दरम्यान जिम्मी के २-मित्र मोटरसाइकल से हमारे पीछे-पीछे लगे पहुंचे! और हमें धनबाद के निकास मार्ग तक पहुंचा कर ही विदा हुए!
राँची; घर, पहुंचकर मैं अपने कमरे में अपने बिस्तर पर लाठी की तरह गिरा, और सो गया!
.........................
रात्री से पहले लगभग ८:४५ बजे हम लोहरदगा, डेरा पर आ गये!
लोहरदगा!
हमारा मुक्तिधाम!
No Electricity, No Road, No Water, No Network, No Doctors,
NO, NOTHING! सिर्फ स्वार्थ!
न दोस्त, ना दोस्ती!
भीषण गर्मी, अँधेरे और कीचड में डूबा हुआ!
मिटटी तेल का बुझा हुआ दिया
और हम मच्छरों के आहार,
फिर भी, जिम्मी ने DAN BROWN की किताब " i n f e r n o" कब्जाई और अपना पोर्टेबल लैंप लेकर ऊपर खुली छत पर उपन्यास का मजा लेने कूदता हुआ चला गया! थोड़ी देर में ही वापस भागता हुआ आया! मुसलाधार बरसात की बौछार शुरू हो गई थी! ...अरे! फिर अचानक थम भी गई!
अपने -इस- शहर में
अपने इस घर में
अभी भी हम
अजनबी हैं!"
_श्री .

Friday, June 7, 2013

बचपन हर गम से बेगाना होता है!

मित्रों!
आज मेरी उम्र 47-वर्ष है! सन है ...ई०-२०१३! लेकिन मेरी बुद्धि, मेरी सोच, मेरे विचार, मेरे संस्कार, मेरा व्यवहार, मेरे रंग-ढंग, मेरी कार्य-प्रणाली, मेरी जीवन-शैली, मेरा रहन-सहन, मेरी पसंद-नापसंद, मेरे शौक, मेरी आदतें, मेरे गुण, मेरे अवगुण, मेरे ऐब, मेरी अभिव्यक्ति, मेरी क्रिया और मेरी प्रतिक्रिया सन १९६८ से लेकर १९८४ तक में ही सीमित हैं! इतने में ही सिमटकर रह गए हैं! यहाँ के बाद मैं बड़ा हुआ ही नहीं, ना होना चाहता हूँ! वजह थोड़ी मनोवैज्ञानिक है, और संभव है किन्हीं और प्रकार के तथ्यों से मेल भी खाता हो(मुझे नहीं पता)!
आदमी के जीवन का (जितनी कि उसकी उम्र सामान्यतः होती है।) सबसे सुहाना दौर, सबसे सुन्दर, सबसे मीठे पल, A GOLDEN LIFE कब होती है? और उसकी समय सीमा -उम्र- क्या/कितनी होती है? थोडा इस विषय पर सोच कर देखिये, प्लीज़! मैं सीधे अपनी बात की बॉटम लाइन बोलूं तो, अक्षरों में उसका नाम है : -"बचपन"-! इसकी उम्र सीमा से पहले यह सोचिये कि -यदि मैं सही हूँ-, तो इसकी वजह क्या है? मेरा उत्तर है : -"स्वाधीनता एवं संरक्षण-!" ....तब, जब किसी बात की भी जिम्मेदारी और जिम्मेवारी से मुक्त होते हैं! वह अवसर, और वह जीवन जी रहे होते हैं, जिसकी चाह में, लालसा में, निर्मल-निश्छल प्रेम में, खिलौनों में, त्योहारों की उमंगों में, फिल्म और कॉमिक्स के किरदारों में, ...खुद के सैटल करते, हिरोइज्म के ज़ज्बे से भरे, निर्भीक दोस्तों में, अपने-अपने शौक का भोग लगाते पलों में, अपनों की उसी भीड़ में, उसी हंसी में, उसी ख़ुशी में, 'निश्चिन्त और लापरवाही' जैसी उछ्रिन्खालता की तनिक और संगत और मित्र-मंडली की चाह की पुनर्प्राप्ति में, -"उस ज़माने में"- अपने दिवंगत या बिछड़ चुके रिश्तेदारों की मौजूदगी और उनकी वजह से प्राप्त "_संरक्षण_" जैसी ही एक नयी संरक्षित छाँव की तलाश में, ...वह संरक्षण, जो हरेक को 'नौनिहाल से लेकर नौजवानी' तक हासिल रहता है, ...लेकिन जो आज नहीं है! वैसी ही दुनिया के पुनर्निर्माण की और प्राप्ति की चाह में, काल का पहिया वापस/reverse घुमाने की जंग में, जो अनवरत हमें ही आगे ओर धकेलता जा रहा है! , ...और हम अकेले हैं, अकेले, नितांत अकेले, अपनी पूरी क्षमता से वापस धकेलने वाली ताक़त की लड़ाई में खोकर ख़तम-से होते जा रहे हैं! इसी हार-जीत (खुद-से) की जंग में हमारी सारी रचनात्मक और कोमल भावनाएं कुम्हला-सी गयीं हैं! बढती उम्र के साथ जीवन की सच्चाई का ज़हरीला घूट जब पहली बार किसी की हलक से नीचे उतरता है ना, _इसकी जलन वही जानता है! फिर उसे वही सुहाने दिन याद आकर सतायेंगे या रुलायेंगे ये हर एक अदद की अपनी लेख की रेखा की बात है! लेकिन आप इस बात का सर्वे कीजिये या शोध कीजिये, LIFE OF RICH & FAMOUS से लेकर एक निम्नतम जीवन स्तर के आदमी का एक ही उत्तर होगा _:"वो भी क्या दिन थे!!" 
दोस्तों, मेरे विचार से यही सबके जीवन का GOLDEN MOMENT होता है! और यही हमसे आज विलग है, और इसी के पुनर्प्राप्ति की लड़ाई आज कई रूपों में लड़ी जा रहीं है! जिसका क़ानून है, एक कड़वा सच : "All's fair in love and war.", अपने-अपने लाक्षणिक गुणों और अपनी सामार्थयानुसार, सभी के सामने एक नहीं अनेकानेक भयंकर और किसी की भी कल्पना से कहीं ज्यादा त्रासद जीवन मुकाबिल है, जो निःसंदेह सर्वशक्तिमान के समकक्ष शक्तिशाली है! ...........पुराने निश्चिन्त हंसी और दोस्तों की भीड़ में, नौजवानी की उमंग की पुनर्प्राप्ति की चाह _यह लड़ाई ही जड़ है, जो कहीं सात्विक और साश्वत है तो कही दुर्दान्त! यह हमारे वश में नहीं! इसीलिए वे पुराने दिन _"हमारा ज़माना"_ के नाम से चर्चित है! जो हर किसी का अलग-अलग होता है! जबकि अभी हम असुरक्षित और भारी जिम्मेदारियों और जिम्मेवारियो के पराधीन हैं! बात अजीब है लेकिन सच है, _इसी वजह से कोई जांबाज़ है, तो कोई एक मानसिक रोगी, एक पीड़ित आत्मा, शरीर के पिजरे में बंद, असहाय! मजारों, और मंदिरों की भीड़ '.....वो लम्बी पौराणिक और सनातन भीड़ और आस्था', से उत्पन्न उम्मीद हमें भी वहीँ जाकर चादर फैलाने को विवश कर देती है, किये हुए है, करती भी रहेगी, क्योंकि आस्था के आगे सभी तर्क गौण हैं! असफलताओं और भ्रस्त तंत्र की मार से हम अधमरों को तो लड़ना भी नहीं आता, सीखने के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती है either in Cash or kind! इस असाध्य छूत की बिमारी ने कितनों को उजाड़ दिया और कितने अभी और उजड़ते जा रहे हैं!

अब इस "हमारे ज़माने" की उम्र की बात पर कोई बहस नहीं हो सकती! ना ही कोई विचार इसे किन्ही एक वाक्यों में रेखांकित कर सकता है! .....but, ....depends !

मेरे ज़माने की उम्र मैंने बता ही दी है! इस दौर के हरेक बात में ऊर्जा है! यही उर्जा _
जो चला नहीं गया,
जो खो नहीं गया,
उसकी बैटरी डाउन नहीं हुई कि,रिचार्ज किया जा सके!
हड़प की गई,
हथिया ली गई,
छीन ली गई,
लूट ली गई,
चुरा ली गई,
लेकिन ताक़त भी इसी इस ज़ुल्म की देन है!  
................
क्या तुम ऐसा ज़ुल्म कर सकोगे?
................
कृतज्ञ और कृतघ्नों के बीच बदलाव को सहना, झेलना, और अपनाने पर हम मनुष्य भले हमेशा विवश रहे हों, पर इससे "हमारे ज़माने" पर कोई फर्क पड़ता है? अपने उस प्यारे अतीत को कोई भूल सका है? नहीं! होश संभालने के बाद से लेकर बढती नौजवानी की तरफ बढती उम्र के बीच न जाने हम कई बार कई बहुरूप में अपने को बड़ा होता देखते हैं, और जिससे, "उस" वक़्त, जिस ICON से आपको लगाव होता है, आप वैसा बनने की कोशिश करते और मुग्ध होते नहीं अघाते! वही ICONS आज भी उसी उम्र और किरदार मात्र की शक्ल में जीवनपर्यंत के लिए अपने हो जाते हैं! उनका आज का रूप-लावण्य भले आज, अब, आपको नहीं लुभाता हो! वही उम्र, वही वक़्त, वही दौर हमारे "आज" की बुनियाद है! इसकी स्टडी से ही कोई भी हमारे अतीत के साथ हमारी ठीक पहचान कर सकता है!
इसलिए मेरी जिद्द है, और लड़ाई ज़ारी रहेगी, _मैं बड़ा होना नहीं चाहता!
मैं आज भी गुल्ली-डंटा खेलना चाहता हूँ, _मुझे आज भी वही गिनती के हंसोड़ शब्द अक्षरशः याद हैं! मैं आज भी "अंटा" _गुच्छु, या शीशे की गोल-गोल गोटियाँ,_गोली, जिसे हम 'अंटा' बोलते हैं", खेलना चाहता हूँ, "मैं आज भी "गुड्डी (= पतंग), अपनी लटाई से उड़ाना, लड़ाना, और तागे का मांझा सोटना चाहता हूँ, वह हर खेल.......... फिर-से खेलना चाहता हूँ, मुहल्ले की गलियों में स्वछन्द दौड़ना-फिरना चाता हूँ, पर यह असंभव नहीं तो बड़ी मुश्किल है; काल पहिया वापस धकेलना यदि संभव होता तो.......!' सो, आगे की सुध ले!
फिर भी 'दिल तो बच्चा है जी!'
और, बचपन हर गम से बेगाना होता है!
२-जनवरी १९६६ को मेरी जन्म हुई! आज २०१३ में मैं ४७-वर्ष के एक शरीर में रहता हूँ! जिसकी शक्ल आपके सामने है! और अक्ल? उसे आपकी, तुम्हारी और तेरी सहायता की ज़रूरत है! क्योंकि मेरा बचपना कायम है!
देखना ये है कि इस मामले में मैं कितना खुशकिस्मत हूँ?
और मैं?
दोस्ती की है, निभानी तो पड़ेगी ही! 
सदैव आपकी सेवा में तत्पर ......

_श्री .

Thursday, June 6, 2013

Naved R Khanposted toश्रीकांत तिवारी

अरे भईया ! ओह !....... Sir you maid my evening. इस ज़िन्दगी में इन शब्दों में इस तरह से प्राप्त यह प्रेम मेरे अब तक के जीवन का पहला अनुभव है, आंसू और मुस्कान जैसे शब्द एक साथ साक्षात मूर्तिमान लग रहे हैं ! नवेद भैया; आपसे प्राप्त यह मेरा अनमोल पुरस्कार मैं ताजिंदगी संभालकर रखूँगा! शुक्रिया! और लाखों सलाम!
08/08/2013

Tuesday, June 4, 2013

i n f e r n o ____________COMPLETED !!

महफ़िल!
किसकी महफ़िल?
खुद की!
तालियाँ, वाहवाहियां और शाबाशियाँ भी, _खुद की!
अमराई में, पेड़ के नीचे, मीर और मिर्ज़ा के शतरंज (Only for Oneself) की बाज़ी जैसी!
खुद की काबिलियत पर खुद ही मुतासिर ...
दूर ..., एक 'गधा' बंधा, खड़ा, इस शेरों-शायरी की महफ़िल से मुख्तलिफ, अपनी क्षुधा-पिपासा के अलावे जिसे और कुछ नहीं चाहिए, ....देख रहा है, ... खा-चबाकर उसकी तरफ फेंके गए उन आम की उन गुठलियों और आम की फलियों के टुकड़ों को,  ...संदिग्ध, ...उसने सूंघा तक नहीं, मुँह फेर लिया।
आम को नापसंद करने वाले, तालियाँ पीटते एक बन्दे ने दुसरे, (इस महफ़िल से अलग) आम का मज़ा लेते बन्दे से, _घृणा से कहा :"देखो गदहा भी आम नहीं खाता!"
दुसरे (आम का मज़ा लेने वाले बन्दे) ने खिलखिला कर _हँसते हुये कहा :"मियाँ! "सिर्फ -गदहे ही- आम" नहीं खाते!"
-------------
अतः हम DAN BROWN को आम ही समझकर पढ़ते हैं, और देसी आम भी, _"जमकर" खाते हैं'! और इसी से हमारी उस क्षुधा-पिपासा को शान्ति मिलती है, जो शीतल गंगाजल अथवा ज़म-ज़म(ZamZam) से मिलती है! कृषण चन्दर जी के सारे-के-सारे 'गधे' मेरे साथ अभी यही "आम" खा रहे हैं, जिसमे हर वह सदगुण समाहित है जो हमारी "-समस्त संकीर्ण मानसिक घमंड-" से परे एक "स्वच्छ", "निर्मल", "निश्च्छल", "निष्पक्ष", "पवित्र", "शुद्ध", _"ज्ञान", "विज्ञान: Every Engineering & Medical Science", "इतिहास", "साहित्य", "कला", "दर्शनशास्त्र", "मनोविज्ञान", "नीति", "कूटनीति", "षड्यंत्र", "रहस्य", "भेद,!....भेद के भीतर भेद", "हर जगह भेद-ही-भेद", "रहस्यमय डरावना रहस्य", "और भेद का उद्भेदन", "THRILL", "ACTION", "SUSPENSE", "TERROR", "HORROR", "रोमांच", के साथ दुनियां के सुन्दर शहर/शहरों की ऐसी सैर, और चौंकाने वाले वैज्ञानिक आविष्कार और यंत्र", जिनका इस्तेमाल दक्ष हाथों से ही नियंत्रित हो सकता है!" "एक विश्व प्रसिद्ध हार्वर्ड युनिवेर्सिटी के आर्ट/सिम्बोलोजिस्ट/आइकोनोलोजिस्ट/हिस्टोरियन, बेहद ही सीधे-सादे 42-वर्षीय प्रोफ़ेसर 'रोबर्ट लैंगडॉन' है, जिनकी सामान्य दिनचर्या की शुरुआत ही -असामान्य- रूप से होती हैं!" (Oh! Dear DAN as usual !! ha ha !) "धर्म", "प्राचीण प्रतीक", या कोई "puzzled दोहा", _भेद भरा!", "आचार", "व्यवहार", "सदगुण", "चरित्र", "मानवता", और कौशल के साथ-साथ 'आदमी-इंसान-मानव-मनुष्य' की सर्वोच्चतम महत्वाकांछा, पशुवृत्ति, और पाशविकता की पराकाष्ठा के डरावने पर सच्चे, खुंखार, बर्बर कुकृत्यों के चरित्र-चित्रण का (without any vulgarity, without any butchered, bloodshed) ऐसा भण्डार है, (outside the boundary of any country and religion) ऐसी सच्चाई है, जिसे ठुकराना निष्ठुरता और कायरता और अनिपुणता हो सकती है, होगी! कभी विवशता के आंसू, ...तो कभी क्रोध की प्रचंड आँधी, ...जिसे हरेक आम खाने वाला पढता है, पढ़ रहा है, पढना चाहिए, पढता होना चाहिए, पढना चाहेगा, और पढ़ेगा भी! आम के साथ "चा"-पानी पीते रहिएगा; DAN के किरदार शायद ही कभी कुछ खाते-पीते है!! पर मान-सम्मान, स्वाभिमान से आप रोमांचित होंगे! ये गारंटी है! गहन शोध से परिस्कृत, विस्तृत विलक्षण विश्लेषण से स्वतः विश्लेषित कथानक, जो किसी और के विश्लेषण का कतई मोहताज़ नहीं!
...पढ़िए!
'..और जो ना पढ़े ...?.....................!'
.......हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है!
चुटकुले और लफंगई की कोई गुंजाइश नहीं! इसके अन्य साधन बेशुमार हैं! but never DAN DROWN!
डेढ़ इंच मोटा, ...और लगभग, ...म्मम्म, ..आधा किलो (से थोदा कम) भारी किताब, 465-पृष्ठ; सिर्फ 24-घंटे की कहानी!! इसकी स्पीड का अंदाजा अब आप लगाइये.....
रहस्य गढ़ना फिर उसे परत-दर-परत उधेड़ने की DAN BROWN की कला बेमिसाल है; जिसमें निहित ज्ञान मेरे (singular; न कि -हमारे- जैसे, कोई मेरे जैसा भला क्यों होगा?) जैसे कूप-मंडूकों को -महासागर- प्रदान करती है!!
i n f e r n o ______complex______COMPLETED !!
HORRIFIC -Unexpected- CLIMAX !!
wOw!! 
YamYam 
"पईसा असूल"
_श्री .

Saturday, June 1, 2013

Candice Swanepoel

http://www.facebook.com/alisonlittleliar.dilaurentis?fref=ts

Candice Swanepoel

My Favorite face

 

मेरे भोले बलम

MERE BHOLE BALAM
मेरे भोले बलम
mere bhole balam, mere pyaare balam मेरे भोले बलम, मेरे प्यारे रे बलम
meraa jivan tere bina, o mere piya hai woh diyaमेरा जीवन तेरे बिना, ओ मेरे पिया है वो दिया
jisame tel naa ho, ke jisame tel naa ho....जिसमे तेल न हो,...के जिसमे तेल न हो ...
meraa jivan tere bina, woh ek baag hai bahaar मेरा जीवन तेरे बिना ... वो एक बाग़ है बहार
jisase hatkar gujare, dur dur se gujare...जिससे हटकर गुजरे, दूर दूर से गुजरे
o mujhe apana bana le, o bhole apana bana le ओ मुझे अपना बना ले , ओ भोले अपना बना ले
haay re bhole apana bana le, haay हाय रे भोले अपना बना ले, हाय
tere kadamo me meraa pyaar, meraa sansaar, meree kismat hai तेरे क़दमो में मेरा प्यार, मेरा संसार, मेरी किस्मत है,
mujhe apana bana le - (2) मुझे अपना बना ले , मुझे अपना बना ले

achchha guru, jab woh aisa kahegee naa, toh mai kya jawaab dunga अच्छा गुरु, जब वो ऐसा कहेगी न, तो मैं क्या जबाब दूंगा?
jawab, jawab, ha ha ha ha are bamru जबाब? हा हा हा हा अरे बांगड़ू
pyaar me, pyaar me, jawaab apne aap ho jaata hai, kahana anuradhaa प्यार में, प्यार में, जबाब अपने आप हो जाता है, कहना अनुराधा
arre guru, guru, anuradha nahee, bindu, bindu अरे गुरु, गुरु , अनुराधा नहीं बिंदु, बिंदु
arre tere kee bhula kahana kahana, kya अरे तेर्र्रे की भुला, कहना, ..., क्या?
meree pyaaree bindu, meree bholee bindu मेरी प्यारी रे बिंदु, मेरी भोली रे बिंदु
meree maatheree bindu, meree sinduree bindu, meree binduri bindu मेरी माथेरी बिंदु, मेरी बिंदुरी बिंदु
meree prem kee naiya bich bhanvar me gud gud gote khaayeमेरी प्रेम की नईया बीच भंवर में गुड-गुड गोते खाय
jhatpat paar laga de, jhatpat paar laga de.....झटपट पार लगा दे, झटपट पार लगा दे
teree bainyaan gale me daal, ban jaa mere gale kaa haarतेरी बइयां गले में डाल, बन जा मेरे गले का हार
jhule prem hindole, o jhule prem hindole झूलें प्रेम हिन्डोलें, ओ झूलें प्रेम हिन्डोलें
mere jivan kee aasha, padh le mere naino kee bhaasha मेरे जीवन की आशा, पढ़ ले मेरे नैनों की भाषा
mujhe mann me basa le, pal pal palako me chhupa le...मुझे मन में बसा ले, पल पल पलकों में छुपा ले
too jhatpat aakar chhatpat mere andhe kuye me dip jalaake तू झटपट आकर छटपट मेरे अंधे कुवें में दीप जलाके 
kar de ujaala, o jara kar de ujaala......कर दे उजाला,ओ जरा कर दे उजाला
bindu re e e e, bindu re e e e, bindu re e e e.........बिंदु रे  ए ए ए बिंदु रे  ए ए ए बिंदु रे  ए ए ए

http://www.youtube.com/watch?v=SU9pv9t4K60

Wednesday, May 29, 2013

i n f e r n o मात्र 55-पृष्ठों की summary concluding words ...

i n f e r n o
DAN BROWN  के इस नोवेल को पढने के दरम्यान मैंने पाया की इस नायब कथानक के ज़लाल को शेयर करना चाहिए! वो ही INGREDIENTS वो ही BLEND वो ही भाषाशैली वो ही कथानक के प्रस्तुति का ढंग सब कुछ वही, A Complete DAN BROWN novel! Friends, दिवंगत राजकपूर साहब, मनोज कुमार साहब, दिवंगत यश चोपड़ा साहब और श्री सुभाष घई की फिल्मो को आपने बराबर, बढियां से, और गौर से देखा है तो आपने अवश्य नोट किया होगा कि इनके अपने-अपने ingredients, blends, language, lyrics, music, dialogues, cinematography, camera angle, filming, choreography, और फिल्म को पेश करने presentation का ख़ास अंदाज़ रहा है। जिसे देखते ही सतोष होता है! ठीक उसी तरह लगातार निखरती जा रही DAN BROWN की लेखनी को पढना वैसे ही रोमांचक अहसास से हमारा पुनःपरिचय/मिलन कराते हुए हमें रहस्य रोमांच की उसी दुनिया की सैर कराता है जिससे वांछित भूख को शान्ति मिलती है...! मैंने मात्र 55-पृष्ठों की summary पेश की; उन्हीं पृष्ठों में निन्लिखित भी शामिल है, जो मेरी summary को concluding words प्रदान करता है :
>>>>>>>>>
On the Mendacium facilitator Knowlton watching the video he was supposed to share with the world tomorrow morning.:
लाल प्रकाश की आभा में ...  पानी के नीचे गुफा की कंदरा क्र दिवाल से सटा खड़ा विकृत सिर और चोंच जैसे मास्क सामान चेहरे और धधकती हरी ज्वाला जैसी आँखों वाली परछाईं की आवाज़ :
In a muffled voice, this deformed shadow spoke:

These are the new Dark Ages.
Centuries ago, Europe was in the depths of its own misery __ the population huddled, starving, mired in sin and hopelessness. They were as a congested forest, suffocated by deadwood, awaiting God's lightning strike __ the spark that would finally ignite the fire that would rage across the land and clear the deadwood, once again bringing sunshine to the healthy roots.
Culling is God's natural order.
Ask yourself, what followed the Black Death?
We all know the answer.
The Renaissance.
Rebirth.
It has always been this way. Death is followed by birth.
To reach the paradise, man must pass through inferno.
This, the master taught us.
And yet the silver-haired ignorant dares call me monster? Does she still not grasp the mathematics of the future? The horrors it will bring?
I am the shade.
I am your salvation.
And so I stand, deep within this cavern, gazing out across the lagoon that reflects no stars. Here in this sunken palace, Inferno smolders beneath the waters.
Soon it will burst into flames.
And when it does, nothing on earth will be able to stop it.
 ...................
_श्री .





























Tuesday, May 28, 2013

inferno by DAN BROWN

i n f e r n o

पौराणिकता के प्रतीक; Symbols, और अति आधुनिक _अभी से भी कुछ आगे की_ आधुनिकता (विज्ञान और वैज्ञानिक आविष्कार) का शानदार तालमेल : एक दहशतनाक रोमांचक और लोमहर्षक चमत्कृत थ्रिलर, होर्रिफिक एक्शन पैक्ड, अद्भुद (HORROR-Like) HIGH HEART BEATINGS रहस्य कथा, विलक्षण और नई जानकारियों, ज्ञान-विज्ञान और नए आविष्कारों का विस्तृत विवरण सहित, उसके सदुपयोग-दुरुपयोग से भरपूर, नहीं रुकने वाली, तीव्र गतिशील, नयी कहानी !! ....न पढना नुकसानदेह!
prologue से पहले लेखक महोदय फरमाते हैं, और क्या खूब फरमाते है :
The darkest places in hell are those who maintain their neutrality in times of moral crisis.

FACTS:
All art work, literature, science, and historical references in this novel are real.

"The Consortium" is a private organization with offices in seven countries. Its name has been changed for considerations of security and privacy.

Inferno is the underworld as described in Dante Alighieiri's epic poem "The Divine Comedy", which portrays hell as an elaborately structured realm populated by entities known as "shades" __ bodyless souls trapped between life and death.
--------------------
PROLOGUE:
मैं परछाईं हूँ! (मेरे मन ने मुझे तसल्ली दी; सू-सू कर आया हूँ, डर किस बात का?)
I am the shade.
मैं इस दुखद नगर को छोड़ता हूँ!
अनादि-अनंत कष्ट से होते हुए, मैं भाग रहा हूँ!
Arno नदी के किनारे ...शीघ्रता से, ...मुश्किल से सांस लेते, ...उत्तर दिशा की ओर, ...Uffizi की छायों में छिपते,
...वे अभी भी मेरा पीछा कर रहे हैं!
उनके भारी क़दमों की आवाज़ पूरी दृढ़ता से मेरे पीछे चली आ रही है! सदियों से वे मेरा पीछा कर रहे हैं, ....उनके इस लगातार श्रम ने मुझे ज़मींदोज़ कर रखा था, ...पाप की सजा के लिए मुझे विवश कर रखा था, ...ज़मीन के नीचे, एक दैत्य की तरह ... मैं परछाईं हूँ! I am the shade.
यहाँ अब ज़मीन पर, मैं उत्तर की ओर आँखें उठाता हूँ, ...लेकिन शैतान के प्रभाव से छुटकारे का कोई पथ नहीं, ...भागते हुए; लोहे के दरवाजे, सीढ़ियों के दहाने तक आ गया; यहाँ प्रत्येक हिचकिचाहट को पीछे छोड़ना पड़ेगा! ....मैं अन्दर प्रवेश कर गया, मैं जानता हूँ यहाँ से वापसी नामुमकिन है,....मैं सीढियाँ फलांगता गया, ...
नीछे आवाजें गूँज रही हैं,...वे दृढ़ता से मेरे पीछे आ रहे हैं,... !
उन्हें नहीं मालुम क्या होने वाला है, ...और उन्हें यह भी नहीं मालुम कि मैंने उनके लिए क्या किया है...!
 "कृतघ्न ज़मीन !" 
As I climb, the vision come hard . . . the lustful bodies writhing in fiery rain, the gluttonous souls floating in excrement, the treacherous villains frozen in Satan's icy grip. मैं आखिरी सीढ़ी के बाद ऊपर पहुँच गया,. मृतवत-सा घिसटता हुआ, ...सुबह की नम हवा में, ... शीघ्रता से उँची दिवाल पर चढ़कर मैंने झिर्री से देखा ....दूर नीचे ...इस सौभाग्यशाली-धन्य नगरी को, ....जिसे मैंने अपना अभ्यारण्य, (सुरक्षित विचरण का स्थान) बना रक्खा था, ...और वे, जिन्होनें मुझे निर्वासित कर रक्खा था !
नीचे से आवाज़ गूंजी :"जो तुमने किया वह पागलपन है!"
"पागलपन ही पागलपन को जन्माता है!" Madness breeds madness!
"ईश्वर के नाम पर', ...नीचे से आवाज़ आई, "बतलाओ तुमे इसे कहाँ छिपाया है?"
बिलकुल, ईश्वर के ही नाम पर, मैं नहीं बताऊंगा!
ठंढे पथरीले कोने में मैं खड़ा रहा, उन्होंने मेरी साफ़ हरी आँखों में झाँका, उनके भाव उग्र हैं, कोई नम्रता नहीं, सिर्फ धमकी ! ..."तुम्हें पता है कि हमारी विधियाँ क्या हैं, हम तुम्हें बोलने के लिए विवश कर देंगे कि तुमने इसे कहाँ छिपाया है!"
उसी वजह से मैं स्वर्ग की ओर की आधी दूरी तय कर आया हूँ ...! फिर बिना चेतावनी, मैं दीवाल के शीर्ष पर चढ़, घुटनों के बल बैठ गया, ...फिर खड़ा हुआ, ...अडिग, ...उच्चतम शीर्ष पर, किनारे, ...Guide me dear Virgil, across the void.
अविश्वसनीय-से वे शीघ्रता से मेरी और लपके, ...मेरे परों को पकड़कर, मुझे अपने काबु में करना चाहा, ...पर डरते भी थे, कि उनकी भूल से मैं गिर न जाऊं ! ...और अब, गिड़गिड़ा रहे हैं, ...पर मैंने पीठ फेर लिया,
'...I know what I must do.`
Beneath me, dizzyingly (संभ्रमित, चक्कर से आक्रांत) far beneath me, the red tile roofs spread out like a sea of fire on the countryside, illuminating the fair land upon which giants once roamed . . . Giotto, Donatello, Brunelleschi, Michelangelo, Botticelli.
मैंने अपने (पैरों के) अंगूठे किनारे की और बढ़ाई!
"नीचे आ जाओ', _वे चीखे, "अभी बहुत देर नहीं हुई है ..."
ओ, दुराग्रही अज्ञानियों! क्या तुम भविष्य नहीं देखते? क्या तुम्हें मेरी कृति, मेरे द्वारा निर्मित वैभव /शान का तनिक भी ज्ञान नहीं?
I will gladly make this ultimate sacrifice . . . and with it extinguish your final hope of finding what you seek.
समय रहते तुम इसे कभी न पा सकोगे!
ऊपर से नीचे का दृश्य एक 'मरूद्यान-सा' दीख पड़ रहा है! ....समय का अभाव है, ...इस अंतिम दौर के नन्हें पलों में, नीचे Piazza को मैंने गौर से निहारा, ...मैं भौंचक्का सा हूँ,...
मैंने तुम्हारा चेहरा देखा!!
परछाइयों के पीछे से तुम मुझी को घूर रहे हो। तुम्हारी आँखें विषादपूर्ण हैं! फिर भी मैं देखता हूँ कि इनमें श्रद्धा है; जो मेरी ही उपलब्धि है! तुम जानते मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं!  मानवजाती के नाम पर, मैं अपनी उत्कृष्ट कृति की अवश्य रक्षा करूँगा!
It grew even now . . . waiting . . . simmering beneath the bloodred waters of the lagoon that reflects no stars.
अतः, मैं अपनी आखें तुमपर से हटाकर क्षितिज को ध्यान से देखता हूँ,; भार तले दबे इस संसार से ऊपर देखते हुए मैं अपनी अंतिम प्रार्थना करता हूँ .....
Dearest God, I pray the world remembers my name not as a monstrous sinner, but as the glorious savior you know I truly am. I pray Mankind will understand the gift I leave behind.
My gift is the future,
My gift is salvation,
My gift is Inferno.
With that, I whisper my amen . . . and take my final step, into the abyss.
______________________________
यादें पानी के बुलबुले की तरह सतह पर आकर फूट रही हैं!
एक झीने नकाब वाली औरत...
रोबर्ट लैंग्डन उसे टकटकी लगाय देख रहा है, वो एक सिरे से दुसरे सिरे तक बहती खून की नदी के किनारे खड़ी है! उस औरत का चेहरा उसी की तरफ है! उसने हाथों में नीले रंग का कपडा पकड़ा हुआ है! वह लाशों से भरी इस नदी के सम्मान में उसे ऊँचा उठती है, ...'पता लगाओ!' वो बोली, '...ढूंढो,..!' रोबर्ट को लगा जैसे ये शब्द किसी ने उसके दिमाग के भीतर कहे हों! '...कौन हो तुम?' रोबर्टने उससे पूछा! पर उसकी आवाज़ नही फूटी! उस औरत ने फिर कहा :"Time goes short, she whispered, 'seek and find.' रोबर्ट ने उसकी तरफ क़दम बढ़ाए, ...पर वह खून की नदी दुर्गम है, रोबर्ट ने देखा उस औरत के क़दमों में लाशें-ही लाशें पड़ी हैं जिनकी संख्या बढती जा रही है,... कुछ अधमरे शरीर बेदना और यातना से खून उगलते और चीखते, छटपटा रहे हैं, कुछ के शरीर सिर के बल खून के और लाशों के दलदल में आधे डूबे अपने पैरों को झकझोर रहे हैं, ...वह औरत रोबर्ट की तरफ अपना हाथ बढ़ाती है, ...रोबर्ट लैंग्डन जोर से चीखा "कौन हो तुम?" प्रत्युत्तर में वह औरत उसके समीप आकर अपना नकाब हटाती है : वह असाधारण, और अनिन्द्य सुंदरी महिला की उम्र (60)-साठ वर्ष लगती है, उसके बाल जैसे चाँदी के तार हैं, झिलमिला रहे हैं, ...रोबर्ट को लगा जैसे वह उसे पहचानता है;...'But how? Why?' वो छटपटाते पैरों की ओर इशारा करती है, ...एक की जांघ पर कीचड़ से -"R"- लिखा हुआ दिखा, ".... R?" Langdon thought, uncertain, "As in . . . Robert?" "Is that me?" The woman's face revealed nothing. `Seek and find,` she repeated.
Without warning, she began radiating a white light . . . brighter and brighter. Her entire body started vibrating intensely, and then, in a rush of thunder, she exploded into a thousand splintering shards of light. 
 ~~~~~~~~~~ *****~~~~~~~~~~  
रोबर्ट लैंग्डन चीखता-चिल्लाता हुआ उठा! चारों तरफ मेडिकल अल्कोहल की बू है! वह एक हॉस्पिटल बेड पर है! उसकी एक बांह में IV-ड्रिप लगी है! उसके पुरे शरीर में दर्द है! सबसे ज्यादा दर्द, जलन और पीड़ा उसके सर के पिछले हिस्से में हैं, वो स्वतंत्र हाथ से अपने सिर के दर्द वाले स्थान को छूता है,..कई टांकें लगे हैं! ....वह हैरान है, परेशान हैं,... उसे कुछ भी याद नहीं कि वो कहाँ है, और उसकी यह दशा कैसे हुई!? '...जरूर मेरा भारी एक्सीडेंट हुआ होगा!' उसकी नज़र दूर काउंटर पर पड़ी, एक ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक बैग में उसका फेमस 'हैरिस-ट्वीड कोट' खून से लथपथ रखा दिख रहा है! उसके शरीर से जुड़े कई ट्यूब्स और वायर से सम्बंधित यंत्र अनियंत्रित हो कर अपनी अलार्म बजाने लगते हैं! एक उम्रदराज दाढ़ी मूँछ वाला डॉक्टर आकर उसे अटेंड करता है! रोबर्ट उससे बेतहाशा सवाल पूछने लगता है, तब वो जाकर एक महिला डॉक्टर को बुला लाता है! इस बीच कमरे की तेज रौशनी में खिड़की के बाहर उसे सिर्फ अँधेरा दिखाई दिया, और शीशे में उसे अपना अक्स दिखा जो घायल और कमजोर है! उस 32-वर्षीय महिला डॉक्टर का नाम डॉक्टर सियेना ब्रूक है; उसके खुबसूरत, ब्लोंड बाल पोनी-टेल स्टाइल में कसे बंधे हैं! वो उम्रदराज डॉक्टर मार्कोनी से उसका परिचय कराती है! डॉक्टर मार्कोनी को इंग्लिश इसलिए नहीं आती; क्योंकि श्रीकांत तिवारी जी को भी इंग्लिश की आंएँ-बांएँ-शांएँ आज तक (without any assistance) -बोलना-लिखना- नहीं आया! Doctor Sienna Brooks, बड़ी दक्षता से रोबर्ट का परिक्षण करती है, उससे चीखकर उठने पर सवाल करती है तो रोबर्ट उसे अपने भयानक सपने के बारे में बतलाता है! डा . सियेना उसे उत्तेजित पाकर डॉक्टर Marconi को एक सेडेटिव तैयार करने को कहती है! डा.सियेना, रोबर्ट के कुछ जरुरी लेकिन आसान से सवाल सिर्फ रूटीन चेक के लिहाज़ से; यादाश्त परिक्षण, करती है, तब उसे पता चलता है कि रोबर्ट लैंग्डन, एक अमेरिकन हैं, हार्वर्ड युनिवेर्सिटी के माननीय आर्ट, हिस्ट्री टीचर और विश्व प्रसिद्द प्रतीकशास्त्री / SYMBOLOGIST हैं! नाम, पता, परिवार_(रोबर्ट लैंग्डन, सिंगल, बैचलर-हुड प्रेमी) वह तसल्ली के लिए दिन तारीख पूछती है :"Okay Mr. Langdon, " she said still writing, "A couple of routine questions for you. What day of the week is it?
Langdon thought for a moment. "It's Sunday. I remember earlier today walking across campus ... going to an afternoon lecture series, and then ... that's pretty much the last thing I remember. Did I fall?"
"We'll get to that. Do you know where you are?"
Landon took his best guess, "Massachusetts General Hospital?"
Dr. Brook made another note. "And there someone we should call for you? Wife? Children?" 
"Nobody."
डॉक्टर्स उसे बताते हैं कि जब वह हस्पताल में आया था _(when 'you arrived' tonight...)_ वह कुछ बडबड़ा रहा था जिस रिकॉर्ड किया गया था, उसे रिकार्डिंग सुनाई जाती है, वो बोल रहा है : `Ve.....sorry. Ve.....sorry.' जैसे कह रहा हो "वैरी सॉरी, वैरी सॉरी", ऐसा वो क्यों कह रहा था उसे याद नहीं! उसे फिर सपने में दिखी औरत का सुन्दर चेहरा याद आता है, जो खून बहती नदी किनारे लाशों के दलदल के पास खड़ी उसे कुछ ढूंढने को कह रही होती है! उसके जिस्म से सम्बंधित मेडिकल उपकरणों की अलार्मिंग आवाज़ के आधार पर सेडेटिव उसेके IV-ड्रिप में इंजेक्ट कर दिया जाता है! और लिटाकर, आराम करने की हिदायत कर एवं अलार्म बेल की स्विच जो उसके बेड पर लगी होती है उसे समझाकर, कमरे की बत्ती बंदकर डॉक्टर्स चले जाते हैं! अब अँधेरे कमरे से बाहर शहर की skyline ने नज़ारे दिख रहे हैं! उन्हें देखते-देखते, और प्रसिद्द टावर को पहचानते ही रोबर्ट लैंग्डन बुरी तरह चौंकता हुआ सभी दर्द भूलकर तेज़ी से उठ बैठता है, बाहर के नज़ारे मेस्साचुसेत्ट्स (Massachusetts USA) के नहीं उससे 4000-मील दूर के एक सुप्रसिद्ध शहर के हैं!
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-Via Torregalli- के बाहर शक्तिशाली शारीरिक बनावट वाली एक चुस्त-चपल औरत एक भारी भरकम BMW- motorcycle से उतरती है! चीते जैसी चपल चाल से चलती वह अपने शिकार के पीछे है! उसके सर के बालों का स्टाइल Spike-Stood (मैंने ये समझा : जैसे gel के प्रयोग से कांटे ही कांटे बनाय गए हों!) है! जिस्म पर काली black leather riding suit है! उसकी नज़रें तेज़ हैं! शक्तिशाली दृढ चाल से चलती उस औरत के हाथ में silenced weapon हैण्ड-गन है! आज रात एक ओरिजिनल मिशन में वो चूक गई है;  
The coo of a single dove had changed everything.
Now she had come to make it right.
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"मैं -" फ्लोरेंस "- में हूँ!?" I'm in Florence!? वह तेज़ी से लगातार अलार्म् स्विच दबाय जा रहा था! Dr. Brook जल्द वहां आ गई और रोबर्ट को संभाला! "...मैं ....ईटली में हूँ!!??" 
"Good You're remembering." 
"No!" Langdon pointed out the window at the commanding edifice in the distance. "I recognize the Plazzo Vecchio."
 डॉक्टर सियेना ब्रूक, रोबर्ट लैंग्डन को समझाती है: '...Mr. Langdon, there's no need to worry. You're suffering from mild amnesia. But Dr, Macroni confirmed that your brain function is fine." डॉ.मार्कोनी भी आ गए थे! रोबर्ट, उत्तेजना और सेडेटिव की मिश्रित असर में था, वह कई सवाल पूछना चाहता था! "What happened to me.?" he demanded. "What day is it?"
"Everything is fine," she said,:"It's early morning. Monday. March eighteenth."
'................That was two days ago!?' The 'ping' of the heart monitor accelerated.
"You're going to be okay." डॉक्टर्स ने फिर से उसके यादाश्त का पुनर्परीक्षण किया! "...Fine!'
"How did I get here?" वह फिर बेचैन हुआ। The 'ping' of the heart monitor accelerated.
डॉक्टर सियेना ब्रूक ने बताया कि अब से तीन घंटे पहले वह हॉस्पिटल के इमरजेंसी रूम में लडखडाते खून से लथपथ आया था: "...bleeding from a head wound, and you immediately collapsed. किसी को तुम्हारे बारे में कुछ पता नहीं था; तब डॉक्टर मार्कोनी ने तुम्हें संभाला, I am on sabbatical here from U.K." रोबर्ट और परेशान हो उठा "What the hell I'm doing in Italy?" बेचैन और उत्तेजित रोबर्ट को सेडेटिव और ज़ख़्मी हालत में सख्त आराम की जरुरत थी, वर्ना उसे hemorrhage का घातक खतरा था! ...........तभी बाहर से शोर-शराबे की आवाज़ के साथ डॉ मार्कोनी के लिए सन्देश गूंजा जिसे उसने रिसीव किया तो पता चला कोई रोबर्ट लैंग्डन से मिलना चाहता है, लेकिन ICU में समय से पहले उन्हें कैसे जाने दिया जाय?; और आगंतुक मानने को राज़ी नहीं! रोबर्ट लैंग्डन को थोड़ी उम्मीद जगी कि कोई जानकार आया है;.... इधर डॉ सियेना ब्रूक ने रोबर्ट से कहा कि पिछली रात की कुछ ऐसी बातें हैं जो वह नहीं जानता! "...जैसे आपको हुआ क्या?" "...और इससे पहले कि आप किसी और से बातें करें, मैं सोचती हूँ आप सभी हक़ीक़तों से वाकिफ हो लें! और दुर्भाग्य से आप अभी इतने तंदुरुस्त नहीं कि ..."
"कैसी बातें? कैसी हकीक़तें?" IV उसके जिस्म से दूर रहने से निडिल चुभी, फिर भी वो बोलता रहा : "मैं सिर्फ इतना जानता हूँ कि मैं 'फ्लोरेंस' के एक अस्पताल में हूँ जहाँ मैंने '-वैरी सॉरी-' जैसे कुछ शब्द कहे ...." "मुझे क्या हुआ था, कैसे और किस तरह मेरे सिर के पीछे चोट लगी कि मैं इतना घायल हो गया कि मेरे कपडे तक खून से तर हो गए?" तब डॉ सियेना ब्रूक ने आखिरकार बताया: 'आप पर गोली चलाई गई थी!! गोली आपके सिर में, बिना खोपड़ी चठकाय, आपकी सिर के पीछे एक लम्बा चीरा-सा लगाती गुजर गई, अगर गोली एक इंच नीचे होती तो...!' "रोबर्ट लैंग्डन सन्न रह गया! तभी बाहर से ऊँचा और गुस्से में बोलने का शोर आया, और दरवाजे खुलने-पटकाने की जोर की आवाज़ आई! सबने देखा काले चमड़े के सूट पहने एक कंटीले, खड़े बालों वाली कद्दावर औरत उनकी और चली आ रही है, बिना कुछ भी समझे डॉ मार्कोनी कमरे से बाहर आकर उस औरत को रोकने को सोच ही रहे थे कि उस औरत ने अपने हाथ में थामे गन से डॉ मार्कोनी को शूट कर दिया, डॉ मार्कोनी पछाड़ खाकर गिरे और बिलखती हुई डॉ सियेना की बाहों में गिरकर मुँह से खून की उलटी करते प्राण त्याग दिए!! दहशत से जडवत रोबर्ट लैंग्डन ने देखा कि अब वो औरत गन का रुख उसकी और कर ट्रिगर दबा रही है! रोबर्ट लैंग्डन ने सोचा "I'm going to die. Here and Now!..तो मैं ऐसे मरने वाला हूँ(हा हा!)!?" गोली चली! और जोरदार आवाज़ से ICU का लोहे का दरवाजा; डॉ सियेना ने; धडाम से बंद कर अन्दर से बोल्ट कर दिया! गोली लोहे की चदर पर एक उभार मात्र बना सकी! फिर उस दरवाजे पर गोलियों की बारिष सी होने लगी! यहाँ से डॉ सियेना रोबर्ट को घसीटते हुए, जिससे IV की निडिल से रोबर्टका हाथ घायल हो गया और उससे खून रिसने लगा! फिर भी सियेना ने, काउंटर पर प्लास्टिक बैग में रखे रोबर्ट लैंग्डन के कोट और कपड़ों को उठा लिया! ("...अर्र्रे, छोड़ो उन्हें,_रोबर्ट ने सोचा!) और अस्पताल के भीतरी कई भागों से गुजरते, लिफ्ट से नीचे आकर जबरन एक टैक्सी में बैठे ही थे कि उनके पीछे गोलियां चलने लगीं! एक गोली ने ड्राइवर्स साइड मिरर को फोड़ गिया दूसरी ने पिछली सीट के शीशे के परखच्चे उड़ा दिए जिसके कांच की बौछार, शावर की तरह रोबर्ट और सियेना पर गिरे! तब कहीं जाकर 'ऊंघते, अकडू' ड्राईवर को गाडी भगानी सूझी! 
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ईटली की COST से 5-मील परे, समुद्र में 237-FOOT LUXURY YACHT the 'Mendacium' (दी मेंडासियम) सांझ ढले तैर रही है! ...with a price tag of over 300 million U.S. dollars, the craft boasted all the usual amenities __ Spa, Pool, Cinema, Personal submarine, and helicopter pad........{इस यौट के कर्मी, मालिक से ज्यादा अपने काम और काम के लिए उपलब्ध साजोसामान से प्यार करते है!}__ A lead-lined, military grade, electronic command center. _______(ढन-.....टा ......नाँ...आआआ__न !) Fed by three satellite links and a redundant array of  terrestrial relay stations, the control room on The Mendacium had a staff of nearly two dozen  __ technicians, analyst, operation coordinators __ who lived on board and remained in constant contact with the organization's various land-based operation centers.
The ship's on board security included a small unit of military-trained soldiers, two missile-detection systems, and an arsenal of of the latest weapons available. Other staff __ cooks, cleaning, and service __ pushed the total number on board to more than forty. The Mendacium was, in effect the portable office building from which the -owner- ran his empire. उसे सार स्टाफ "the provost" के नाम से जानता है!! {इस नाम को बड़ी सरलता से सिम्पली by small letters, without any "inverted commas", or bold letters से छापा गया है!} इसका हुलिया कोई खासियत के बगैर सामान्य-सा है! यह और भी कई नामों से जाना जाता है : जैसे : ~ a soulless mercenary, a facilitator of sin, the devil's enabler __पर ये ऐसा कुछ नहीं लगता! the provost अपने क्लाइंट्स को सिर्फ इतना ही पाने का अवसर देता है कि उनकी आकांक्षाएं और इच्छाएं बिना कोई प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाये पूरी कर सके! प्राकृतिक पाप से उसका क्या लेना-देना भला; ये उसकी समस्या नहीं है! इस प्रकार वह ज्यादा प्रतिष्ठित, और मांग में रहता है! उसका उसूल है: Never make a promise you cannot make. And never lie to a client. Ever. अपने पेशावर करियर में उसने कभी कोई वादा नहीं तोड़ा है! उसके शब्द - पूर्ण गारंटी की हैसियत रखते हैं! वह अपने प्राइवेट बालकनी में खड़ा समुद्र की हवा को सूंघते सोच रहा है :" The decisions of our past are the architects of our future." लेकिन आज ईटैलियन मेनलैंड को देखते उसे सोचना पड़ रहा है कि कुछ ऐसा हुआ, जो असामान्य है! एक साल पहले इसी यौट पर उसने किसी से एक वादा किया था जिसकी जटिलता उसके आजतक के निर्मित हर चीज़ के लिए एक खतरा/धमकी-सी प्रतीत हो रही है! "I agreed to provide services to a wrong man." और अब उसे लग रहा है कि उसे अपने चुनिन्दा बेस्ट एजेंट्स को फील्ड में भेजना पड़ेगा इस आदेश के साथ कि :"whatever it took', to keep his listing ship from capsizing."  'VAYENTHA" वायेंथा ; उसकी फील्ड एजेंट, कांटेदार हेयर स्टाइल वाली लड़की; जिसने इस मिशन से पहले कभी उसे निराश नहीं किया था; ने कल रात एक ऐसी भूल/गलती कर दी है, वो भी एक कबूतर की coo की वजह से !?; जो उसकी अब तक की प्रतिष्ठा के लिए बुरा है! आज तक उसके सर्विस के रिकार्ड पर कोई ऊँगली नहीं उठी थी! Control was the provostt's expertise. सफलता और गोपनीयता उसका रिकार्ड रहा है! उसके क्लाइंट्स हैं _billionaires, politicians, sheikhs, and even entire governments. पूर्व में सूरज की उदीयमान लालिमा दिख रही हैं, और अपने डेक पर खड़ा provost, वायेंथा की तरफ से सुनना चाहता था कि सबकुछ प्लान के मुताबिक निष्पादित किया जा चुका था; (अंज़ाम तक पहुंचाया जा चूका था!)!
...तभी आतुर व्याकुल provost के कंप्यूटर स्क्रीन पर वायेंथा का कॉल आता है; वह नर्वस है! :"Langdon has escaped', she said, 'he has the object."
"Understood," the provost finally said,"I imagine he will reach out to the authorities as soon as possibly he can."
...........................
the 'Mendacium' (दी मेंडासियम) Two deck below the provost, in the ship's secure control center, senior facilitator Laurence Knowlton (लौरेंस नोल्टन) ने पाया कि provost का encrypted call पूरा हो चूका है! उम्मीद है, अच्छा समाचार ही होगा! दो दिनों से provost का तनाव नाज़ुक स्थिति में है! सभी स्टाफ को आभास है कि कोई ऐसा मिशन चल रहा है जिस पर भारी दांव लगे हैं! समूची दुनियां में इस के अलावे भी और कई महत्वपूर्ण मिशन चल रहे हैं; लेकिन provost का ध्यान इसी ख़ास मिशन पर ज्यादा है; जिसके लिए वायेंथा काफी थी! एक निष्ठावान कर्मचारी की तरह लौरेंस नोल्टन के विचार सिर्फ अपने काम और उसे मिले आदेश का पालन करने में लगे रहते हैं! वह अपने क्यूबिकल से निकल कर आगे बढ़ता है, कई और क्युबिकल्स जिनमे कुछ के शीशे ट्रांसपेरेंट हैं तो कुछ के ओपेक! इनके भीतर सभी स्टाफ इसी मिशन पर जुटे हैं! एक कमरे से वो एक लाल मेमोरी-स्टिक, जिसमे एक ख़ास विडियो फाइल है, चुनकर अपने साथ लेकर वापस अपने क्यूबिकल में आ बैठता है, फिर एक स्विच ऑन करते ही उसका पारदर्शी क्यूबिकल; गहरा दुधिया, धुंधला; -opaque- हो जाता है! इस वैज्ञानिक पद्धति को "Suspended particle device" SPD glass कहते हैं! (पूरी जानकारी के लिए किताब पढ़िए!) इस गुमनाम, रहस्यमय विडियो फाइल को आज नियमानुसार review कर अपडेट करना और रिपोर्ट दाखिल करना है! Knowlton मेमोरी-स्टिक को कंप्यूटर में इन्सर्ट करता है, शीघ्र ही उसके स्क्रीन पर काली तस्वीर और स्पीकर्स से पानी के भीतर 'चलायमान पानी' की आवाज़ आने लगती है! आश्चर्यजनक ढँग से जैसे पानी खुद-बा-खुद रौशन होती है, जैसे अन्दर से रौशनी बाहर एमिटेड हो रही हो! एक गुफा का दृश्य उभरता है, रौशनी में लाल रंग की आभा (Tint) है! Knowlton ने ऐसा पहले कभी नहीं देखा है! :"What . . . is this place?" कैमरा सीधे नीचे रौशन गुफा की गहराई में उतरता जा रहा है, जबतक कि वह रौशनी के श्रोत तक नहीं पहुँच गया; Shimmering; चमचमाता हुआ टाईटेनीयम (Titanium) का एक Plaque; प्लेट(फलक) है, जिस पर ये अक्षर गुदे हुए हैं :
IN THIS PLACE, ON THIS DATE 
THE WORLD WAS CHANGED FOREVER
Engraved at the bottom of the plaque was a name and a date. The name was that of the client. The date . . . tomorrow.
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डॉ. सियेना ब्रूक लडखडाते रोबर्ट लैंग्डन को बहुत मशक्कत कर के सीढ़ियों द्वारा ऊपर अपने घर ले आती है! sedative के असर से रोबर्ट लैंग्डन की दृष्टि धुंधली है। उसके हैरिस-ट्वीड जैकेट/कोट को उसकी बांह पर कसकर बाँधा गया था ताकि ज्याद खून न बहे! लिफ्ट द्वारा ऊपर चढ़ते वही (Hallucinating)...मतिभ्रम;  वह फिर वही दृश्य देखा रहा है : नकाबधारी औरत, जो जब नकाब हटाती है तो एक देवी सी सुन्दर साठ-वर्षीय वृधा, जिसके चांदी से बाल हैं, उसे अपनी ओर बुला रही है, "Seek and Find"_वो कहती है! रोबर्ट लैंग्डनके दिमाग के भीतर ये स्वर गूंजे! फिर उसने देखा, खून की नदी, असंख्य लाशों और अधमरे, मृत्यु की ओर अग्रसर खून के दलदल में उलटे शरीर और उनके छटपटाते पैर, एक की जांघ पर "R" लिखा है, रोबर्ट लैंग्डन:"Who are you?" he called out in silence, "What do you want." उसके चाँदी के बाल हवा में लहरा रहे हैं : "Our time grows short."_She whispered. फिर बिना चेतावनी वह एक तीव्र प्रकाश पुंज में बदलकर; प्रस्फुटित होकर कई-कई नन्हे सितारों में विलीन हो गई! रोबर्ट लैंग्डन ने चिल्लाकर आँखें खोली! डॉ सियेना के चौंक कर पूछने पर उसने फिर इस hallucination के बारे में बताया! उसने फिर वही दृश्य देखा है! डॉ सियेना से उसे आश्वाशन दिया। वे डॉ सियेना के अपार्टमेंट में पहुंचे! डॉ सियेना रोबर्ट लैंग्डन को सिडेटिव के असर से उबरने के लिए कुछ कैफीन के चोकलेट्स जैसे दाने चाबने को दिये और कुछ दवाईयाँ दी, फिर उसके घायल हाथ का उपचार किया! रोबर्ट लैंग्डन अब कुछ अच्छा महसूस कर रहा है, लेकिन उसके सिर का घाव उसे अभी भी दर्दनाक पीड़ा दे रहा है! "क्या मुझे अमेरिकन कांस्युलेट, कोई ऑथोरिटी, या पुलिस से संपर्क नहीं करना चाहिए? रोबर्ट लैंग्डन ने सियेना से पूछा ! पहले तुम मुझे डॉक्टर कहना बंद करो! इस प्रकार वे औपचारिक शब्दों को छोड़ ज्यादा फ्रैंक हुए! यहाँ रोबर्ट लैंग्डन को ख्याल आया कि उसकी 40-साल पुरानी एंटिक मिक्की-माउस घडी मिसिंग है! सियेना को भी पता नहीं! वो उसे बाथरूम में छोड़कर पड़ोस से रोबर्ट लैंग्डन के लिए मुनासिब कपडे लाने चली जाती है ताकि पुलिस, या कोई ऑथोरिटी के सामने वो ढंग से पेश हो सके!
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रोबर्ट लैंग्डन फ्रेश होकर; एक तौलिया कमर में लपेटे; बाथरूम से बाहर आता है! "कौन और क्यों मुझे मारना चाहता है? सोचो रोबर्ट सोचो! उसे कुछ याद नहीं! और 'मैं फ्लोरेंस, ईटली, में क्यों हूँ??' फ्लोरेंस _इन्ही की गलियों में कभी 'माइकल-एंजेलो' खेला करते थे! रोबर्ट लैंग्डन डॉ सियेना के फ्लैट में विचरता है तो उसे लैपटॉप दिखाई पड़ता है, उसे चालूकर वह इन्टरनेट पर अपने बारे में ताज़ी घटनाओं की छानबीन करता है, कुछ नहीं, सिर्फ काम काम काम और प्रशंसा! लगता है किसी को पता नहीं कि मैं लापता हूँ! वह लैपटॉप बंद कर देता है! फ्लैट में रोबर्ट लैंग्डन को डॉ सियेना के बारे में उसके टेबल पर रखे डायरी, और अन्य कागजातों, और तस्वीरों के द्वारा बचपन से लेकर हाल तक की जानकारी हासिल होती है! सियेना एक अद्भुद लड़की रही है, बिलक्षण! God-gifted & Blessed! शानदार और काबिलेतारीफ, 208-IQ वाली विलक्षण बच्ची! जो जन्म से ही एक सेलिब्रेटी जैसी ख्याति रखती है! उसकी Extraordinary विलक्षणता एक तरह से उसके लिए एक श्राप भी थी। वह स्कूल में नहीं टिक पाई; क्योंकि सभी उसे चिढाते थे! और वह 10-वर्षों तक एक अज्ञातवास सा जीवन जीते, उसने अपनी शिक्षा पूरी की थी! ऐसी बच्ची के प्रति रोबर्ट लैंग्डन का दिल भर आया! उसने सभी कागज़ात वापस सुरक्षित रख दिए! उन कागजातों के cover पर लिखा था :"Sweetheart, never forget you are a miracle." Cover पर पौराणिक ग्रीक Symbol _ Comedy एंड Tragedy (La maschere) का निशान है! ...अचानक रोबर्ट लैंग्डन की हालत फिर बिगडती है, वह बेहोशी की अवस्था में फिर से वही दृश्य देख रहा है: चाँदी के बालों वाली नकाबपोश महिला, खून की नदी और असंख्य लाशें, और अधमरों की भयानक चीखें!! "Seek and Find" the woman called to Langdon. रोबर्ट लैंग्डन फिर पूछता है,:"Who are You?" Once again the woman reached up and lifted her veil to reveal the same striking visage that Langdon had seen earlier. 
"I am life," ''मैं ज़िन्दगी हूँ!'' she said.
Without warning a colossal image materialized in the sky above her __ a fearsome mask with a long, beaklike nose and two fiery green eyes, which stared blankly out at Lngdon.
"And . . . I am death", ''और .....मैं  मौत हूँ!!'' the voice boomed.
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रोबर्ट लैंग्डन ने पसीने-पसीने हो, हड़बड़ा कर आँखें खोली :"What the hell in happening to me?" The images of silver-haired woman and the beaked mask lingered in his mind : I am life. I am death. अपार्टमेंट के फोन की घंटी बजी, रोबर्ट ने उठ खड़े होकर सियेना को पुकारा, वह अभी तक नहीं लौटी थी, फोन के beep के बाद कॉलर की आवाज़ सुनाई दी: Hospital से Danikova -सियेना की तरह एक डॉक्टर- ने फोन किया है, उसकी आतंकित आवाज़ टूटी-फूटी English में काँप रही है: "...सियेना! तुम्हारे मित्र डॉ मार्कोनी मर चुके हैं, Hospital is going crazy, पुलिस आई! लोगों ने बतला दिया है कि तुम एक मरीज़ के साथ, उसे बचाते हुए, भागी हो!! क्यों? तुम तो उसे जानती तक नहीं! और अब पुलिस तुमसे सवाल करने के लिए तुम्हें ढूंढ़ रही है! They take employee file! मैं जानती हूँ उस फाइल में सभी सूचनाएं गलत हैं : "I know information wrong -- bad address, no numbers, faking working visa -- so the no find you today, but soon they find! I try to warn you, so sorry, Sienna." The call ended. रोबर्ट लैंग्डन आत्मग्लानी से भर उठा! डॉ मार्कोनी ने सियेना को हॉस्पिटल में काम दिया था! उसकी वजह से डॉ मार्कोनी की जान गई! और अब एक अजनबी को बचाने में लगी डॉ सियेना का भविष्य दांव पर है! फोन फिर बजा, वह जानता है, सियेना क्या सुनने वाली है! मरीजों वाले कपड़े उतारे वह सिर्फ टॉवल लपेटे; पदाचाप सुनकर (रोबर्ट) बाथरूम में चला गया! पश्चाताप से भरा हुआ! तभी सियेना ने knock किया, "Door-knob पर तुम्हारे लिए कपडे हैं!"
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सियेना अपने बेडरूम में जाती है! आईने में खुद को देखती है और अपने ब्लोंड-पोनी-टेल बालों वाली 'विग' उतार देती है!!! उसके सिर पर बाल नहीं हैं, bald scalp !!! गंजी !!! उसने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया है! फ्रेश होकर कपड़े बदलकर उसने वापस अपना 'विग' पहना! वर्तमान हालातों से पहले भी खुद पर तरस खाती वह कई विषमताओं से कभी रोते, तो कभी आंसू पीते, जूझती रही है, ...और अब फिर, ...असकी आँखें भर आईं! 'होने दो जो होना है!' उसने आंसुओं को भी नहीं रोका! और वह रोई! वह रोई इस जीवन पर, जिसपर उसका कोई नियंत्रण नहीं! वह रोई अपने विश्वसनीय (Mentor) पितृतुल्य के लिए, जिसने अभी उसकी बाहों में दम तोड़ दिया! वह रोई अपने अकेलेपन के लिए! पर इन सबसे ज्यादा वह रोई अपने आगामी भविष्य के लिए, जो अचानक अनिश्चित-सा हो चूका है!!
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237-FOOT LUXURY YACHT the 'Mendacium' (दी मेंडासियम) के निचले डेक पर लौरेंस नोल्टन आश्चर्य से अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर चलते विडियो को देख रहा है! वह व्याकुल और बेचैन है! "I'm supposed to upload this to the media tomorrow morning?" Consortium के साथ काम करते उसे अपने 10-वर्षीय करियर की याद आई! We follow though. No questions asked. No matter what. इस विडियो को Update करने में वह खुद को असहज पा रहा है! पहले उसने कई विचित्र अभियानों में बेहिचक काम किया, ...लेकिन आज, ...अभी, :"....this video was baffling. चक्कर में डालने वाला, ...Something about it felt different. Much different." उसने Re-Play कर उस विडियो को फिर देखा : लाल आभा से रौशन पानी की निचली गुफा के भीतर कीचड़ भरी कंदरा की सतह पर ....और उसने फिर पढ़ा :
IN THIS PLACE, ON THIS DATE
THE WORLD WAS CHANGED FOREVER
That the polished plaque (फलक) was signed by the Consortium's client was disquieting (बेचैन करने वाला है!). Camera, Pan होकर बायीं ओर का दृश्य दिखला रहा है, एक चौंका देने वाली वस्तु उस फलक के ऊपर मंडरा रही है!! एक पतले कमजोर धागे से बंधा एक प्लास्टिक गोल बैलून तैर रहा है; जिसमे हीलियम गैस की जगह Gelatinous (Explosive) Yellow-Brown-Liquid भरा हुआ एक फुट व्यास का है। ...'Jesus!'.....एक नई तस्वीर उभरती है,....लाल आभा लिए प्रकाश में गहरी गुफा की कंदरा की दीवाल से सटा कोई खड़ा है! एक परछाईं!! the shadow of a man . . . standing in the cavern. लेकिन इस "आदमी" का 'सर' बुरी तरह विकृत है ! ....but the man's head was misshapen badly. ...नाक किसी पक्षी के चोंच की तरह हैं, ...जैसे खुद आधा पक्षी हो, ...वह डरावनी वाकपटुता से बोल रहा है, ...नपे-तुले लहजे में, ...जैसे किसी पौराणिक क्लासिकल का नरेटर हो! As the beaked shadow spoke _लौरेंस नोल्टन की भय के मारे हालत खराब है; ...वह बड़ी कठिनाई से सांस ले पा रहा है! ...
I am the shade.
If you are watching this, then it means my soul is finally at rest.
Driven underground, I must speak to the world from deep within the earth, exiled to this gloomy cavern where the bloodred waters collect in the lagoon that reflects no stars.
But this is my paradise . . . the perfect womb for my fragile child.
Inferno.
Soon you will know what I have left behind.
And yet, even here, I sense the foothills of the ignorant souls who pursue me . . . willing to stop at nothing to thwart my actions.
Forgive them, you might say, for they know not what they do.
But there comes a moment in history when ignorance is no longer a forgivable offense . . . a moment only wisdom has the power to absolve.
With purity of conscience, I have bequeathed to you all the gift of Hope, of salvation, of tomorrow.
And yet, still there are those who hunt me like a dog, fueled by the self-righteous belief that I am a madman. There is the silver-haired beauty who dares call me a monster! Like the clerics who lobbied for the death of Copernicus, she scorns me as a demon, terrified that I have glimpsed the Truth.
But I am not a prophet.
I am your salvation.
I am the shade.
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डॉ सियेना ब्रूक के अपार्टमेंट में सियेना, रोबर्ट लैंग्डन को फिर चेक कर संतुष्ट होती है कि उसकी यादाश्त ठीक है, और वह अब ठीक लग रहा है। रोबर्ट लैंग्डन, सियेना को अपने नए सपने (Hallucination) के बारे में बतलाता है! इस बार वह ये भी बतलाता है कि नकाबपोश चाँदी के बालों वाली औरत के क़दमों में दम तोड़ते एक की जाँघ पर कीचड़ से "R" लिखा हुआ था! फिर वह उसे चोंच सी मास्क वाले के बारे में बतलाया! "I am death?" .....बातचीत से कोई समाधान नहीं सूझा! पर उसे भूलना रोबर्ट लैंग्डन के लिए बहुत कठिन था! सियेना कह रही थी : "...And she keep telling you 'seek and find.?" "हाँ, पर ...क्या??" 
"रोबर्ट मुझे लगता है तूमने उसे पहले ही ढूंढ़ लिया है !" यह कहकर सियेना, रोबर्ट को बुरी तरह चौंका देती है! "क्या कह रही हो तुम!" रोबर्ट चकराया, "मैं तो जानता तक नहीं कि आखिर मुझे ढूंढना क्या है!?" सियेना बतलाती है,:"कल जब तुम हॉस्पिटल आये थे तब वह तुम्हारे कोट के पॉकेट में था!" बुरी तह से हकबकाए हुए रोबर्ट का कोट उसने प्लास्टिक बैग से निकलकर उसे दिया :"इसीलिए मैं वहां से भाग निकलते वक़्त इसे उठा लाइ थी!" रोबर्ट ने कोट की सभी पॉकेट्स खंगाल डाले :"कुछ नहीं!?" सियेना मुस्काई :"सीक्रेट पॉकेट को तो तुमने देखा ही नहीं!!" _"सीक्रेट पॉकेट!?? मेरी कोट में!!?? नहीं मैंने ऐसा कोट कभी सिलवाया ही नहीं!" ....रोबर्ट अचकचाया,:"कोट मेरा ही है, टेलर का टैग/Level भी ठीक है, निःसंदेह यह मेरा ही कोट है, और मैंने कभी कोई सीक्रेट पॉकेट नहीं सिलवाया!" तब सियेना ने उसे उसकी आँखों के सामने उसी कोट में रोबर्ट को सीक्रेट पॉकेट के दर्शन कराये! रोबर्ट इतने नफासत से सिले सीक्रेट पॉकेट की स्लिट को देखकर हैरान रह गया! उसने उसमे हाथ डाला तो एक ऑब्जेक्ट a tube like object उसके हाथ लगा! उसने उसे निकालकर देखा और सियेना को दिखलाया! "मैंने इसे हॉस्पिटल में ही देख लिया था, लेकिन खोला नहीं, अब तुम इसे खोलो और देखो इसमें क्या है!...लेकिन होशियारी से!!" रोबर्ट फिर चकराया "क्यों क्या हुआ? ऐसा क्या है इसमें? ये है क्या"
उसने गौर से उस ट्यूब का मुआयना किया!
"Well, unfortunately", Sienna said, "I DO know what this is. And I'm fairly certain it's the reason someone is trying to kill you."  .....डॉक्टर सियेना ने एक्सप्लेन किया कि ऐसे ट्यूब को
बायो-ट्यूब कहते हैं इसे खोलने के लिए एक ख़ास (शुद्ध और सुरक्षित कॉस्टयूम और वातावरण की जरुरत होती है, क्योंकि ऐसे ट्यूब्स में "वायरस" को भी सुरक्षित ट्रांसपोर्ट किया जाता है! लेकिन अभी के असामान्य हालात में ऐसा संभव नहीं लगता; और जरुरी नहीं कि इसमें वायरस ही हो! रोबर्ट ने ट्यूब का और गहन मुआयना किया उस पर प्रिंटेड सिंबल को देखकर वह चौंका! और उसे पहचाना! (_किताब में देखिये, कैसा सिंबल ?_) इस ट्यूब पर एक Thumb-Pad है जो सिर्फ उसी के ऊँगली के स्कैन से खुलेगी जिसके; ट्यूब सील करने से पहले; कंप्यूटर द्वारा Thumb-Scan कर इसमें  feed किया गया हो! (....किताब पढो गुरूजीयों ) 
रोबर्ट ने जब अपना अंगूठा Thumb-Pad पर रखा तो एक क्लिक की आवाज़ से यह bio-tube खुल गया! अन्दर क्या है?? ______किताब पढ़िए!
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डॉ सियेना के cellphone से रोबर्ट अमेरिकन कांस्युलेट में फोन करता है और अपनी सारी बातें बतलाकर HELP की गुहार लगाता है, अमेरिकन कांस्युलेट अपने सम्मानित नागरिक की सहायता के लिए तुरंत तत्पर होकर रोबर्ट से उसका ठिकाना पूछता है! डॉ सियेना की सलाह और आँखों के इशारे से खिड़की से बाहर देखकर एक होटल का नाम और (अंदाजन एक) रूम नंबर बतला देता है! ...अब प्रतीक्षा, और होटल में जाने की तैयारी के दरम्यान उनकी दृष्टि सहसा खिड़की से बाहर होटल के सामने अभी-अभी रुके एक BMW_Motorcycle, काले चमड़े के कोट वाली, कांटेदार खड़े बालों वाली कद्दावर 'आर्म्ड' लड़की पर पड़ती है, जो होटल में प्रवेश कर चुकी है! ....इधर रोबर्ट लैंग्डन और Doctor Sienna Brooks के होशो-हवास उड़े हुए हैं ! "...कैसे, ...कैसे इसे पता चला कि ...." डॉ सियेना, रोबर्ट को फिर से घसीटती हुई बाहर निकलने के क्रम में बोलती है : "Robert," Sienna whispered, her voice taut with fear. "The U.S. Government just sent someone to kill you."
"RUN !" 'भागो ..........'
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THE STORY TILL THE PAGE NUMBER, SIMPLY @ -55-
...बस्स, भईयवा, पईसा असूल हो गेलई !
अब आप स्वयं विचार करें कि कितने सवाल आपके जेहन में खलबली मचा रहे हैं; जबकि अभी पूरा का पूरा उपन्यास और 462 पृष्ठ बाकी है!!??
i n f e r n o
DAN BROWN  के इस नोवेल को पढने के दरम्यान मैंने पाया की इस नायब कथानक के ज़लाल को शेयर करना चाहिए! वो ही INGREDIENTS वो ही BLEND वो ही भाषाशैली वो ही कथानक के प्रस्तुति का ढंग सब कुछ वही, A Complete DAN BROWN novel! Friends, दिवंगत राजकपूर साहब, मनोज कुमार साहब, दिवंगत यश चोपड़ा साहब और श्री सुभाष घई की फिल्मो को आपने बराबर, बढियां से, और गौर से देखा है तो आपने अवश्य नोट किया होगा कि इनके अपने-अपने ingredients, blends, language, lyrics, music, dialogues, cinematography, camera angle, filming, choreography, और फिल्म को पेश करने presentation का ख़ास अंदाज़ रहा है। जिसे देखते ही सतोष होता है! ठीक उसी तरह लगातार निखरती जा रही DAN BROWN की लेखनी को पढना वैसे ही रोमांचक अहसास से हमारा पुनःपरिचय/मिलन कराते हुए हमें रहस्य रोमांच की उसी दुनिया की सैर कराता है जिससे वांछित भूख को शान्ति मिलती है...! मैंने मात्र 55-पृष्ठों की summary पेश की; उन्हीं पृष्ठों में निन्लिखित भी शामिल है, जो मेरी summary को concluding words प्रदान करता है :
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On the Mendacium facilitator Knowlton watching the video he was supposed to share with the world tomorrow morning.:
लाल प्रकाश की आभा में ...  पानी के नीचे गुफा की कंदरा क्र दिवाल से सटा खड़ा विकृत सिर और चोंच जैसे मास्क सामान चेहरे और धधकती हरी ज्वाला जैसी आँखों वाली परछाईं की आवाज़ :
In a muffled voice, this deformed shadow spoke:

These are the new Dark Ages.
Centuries ago, Europe was in the depths of its own misery __ the population huddled, starving, mired in sin and hopelessness. They were as a congested forest, suffocated by deadwood, awaiting God's lightning strike __ the spark that would finally ignite the fire that would rage across the land and clear the deadwood, once again bringing sunshine to the healthy roots.
Culling is God's natural order.
Ask yourself, what followed the Black Death?
We all know the answer.
The Renaissance.
Rebirth.
It has always been this way. Death is followed by birth.
To reach the paradise, man must pass through inferno.
This, the master taught us.
And yet the silver-haired ignorant dares call me monster? Does she still not grasp the mathematics of the future? The horrors it will bring?
I am the shade.
I am your salvation.
And so I stand, deep within this cavern, gazing out across the lagoon that reflects no stars. Here in this sunken palace, Inferno smolders beneath the waters.
Soon it will burst into flames.
And when it does, nothing on earth will be able to stop it.
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इसके  भाद भागम-भाग,..................BOOM BOOM ............भागम भाग, मैं भागता हूँ आगे की कहानी पढने, आप भागिए किताब हथियाने, ...इस किताब की कहानी यहीं तक कहकर चुप रहना चाहूँगा!
नमस्ते,
_श्री .